शिवमहिम्नः स्तोत्रम् (गन्धर्वराज पुष्पदन्त - सानुवाद सटीक)
Shiva Mahimna Stotram with Hindi Commentary
गन्धर्वराज पुष्पदन्त / आचार्य राजेश दीक्षित द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंभाषा-टीका-सहितम् १५ देवतागण [ब्रह्मा] आदि विहार करते हैं, इसलिये ऐसे प्रियधाम [आश्रय भूत] आपको मैं बार-बार नमस्कार करता हूँ ॥ २८ ॥ नमोनेदिष्ठाय प्रियदव दविष्ठाय च नमो । नमः क्षोदिष्ठाय स्मरहर महिष्ठाय च नमः ॥ नमो वर्षिष्ठाय त्रिनयन यविष्ठाय च नमो । नमः सर्वस्मै ते तदिदमिति शर्वाय च नमः ॥२६॥ हे प्रियदव ! [निर्जन वन-विहरण शील], नेदिष्ठ [अत्यन्त समीप] दविष्ठ [अत्यन्त दूर], क्षोदिष्ठ [अति सूक्ष्म], महिष्ठ [महान्], वर्षिष्ठ [अत्यन्त वृद्ध], यविष्ठ [अतियुवा], सर्वस्वरूप और अनिर्वचनीय आपको नमस्कार है ॥ २६ ॥ बहुलरजसे विश्वोत्पत्तौ भवाय नमो नमः । प्रबलतमसे तत्संहारे हराय नमो नमः ॥ जनसुखकृते सत्त्वोद्रिक्तौमृडाय नमो नमः । प्रमहसि पदे निस्त्रैगुण्ये शिवाय नमो नमः ॥३०॥ हे शिवजी ! जगत् की उत्पत्ति के लिये परम रजोगुण धारण किये भव [ब्रह्मा] रूप आपको बार-बार नमस्कार है और उस जगत् के संहार करने में तमोगुण को धारण करने वाले हर [रुद्र], आपके लिए पुनः-पुनः नमस्कार है, जगत् के सुख के लिए सत्त्व गुण का