भारतकोश
शिवमहिम्नः स्तोत्रम् (गन्धर्वराज पुष्पदन्त - सानुवाद सटीक)

शिवमहिम्नः स्तोत्रम् (गन्धर्वराज पुष्पदन्त - सानुवाद सटीक)

Shiva Mahimna Stotram with Hindi Commentary

गन्धर्वराज पुष्पदन्त / आचार्य राजेश दीक्षित द्वारा

DevanagariSanskritpublished35 पृष्ठ

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भाषा-टीका-सहितम् २५ रसप्रवाहमाधुरीविजृम्भणामधुव्रतम् । स्मरान्तकं पुरान्तकं भवान्तकं मखान्तकं गजान्तकान्धकान्तकं तमन्तकान्तकं भजे ॥१०॥ जो अभिमानरहित पार्वतीकी कलारूप कदम्बमंजरी के मकर न्दस्रोतकी बढ़ती हुई माधुरीकोपान करनेवाले मधुप हैं तथा कामदेव, त्रिपुर, भव, दक्ष-यज्ञ, हाथी, अन्धकासुर और यमराज का भी अन्त करने वाले हैं, उन्हें मैं भजता हूँ ॥ १० ॥ जयत्वदभ्रविभ्रमभ्रमद्भुजंगमश्वस- द्विनिर्गमत्क्रमस्फुरत्करालभालहव्यवाट् । धिमिद्धिमिद्धिमिध्वनन्मृदंगतुंगमंगल- ध्वनिक्रमप्रवर्तितप्रचण्डताण्डवः शिवः ॥११॥ जिनके मस्तक पर बड़े वेग के साथ घूमते हुए भुजंग के फुफ- कारने से ललाट की भयंकर अग्नि क्रमशः धधकती हुई फैल रही है, धिम-धिम बजते हुए मृदंग के गम्भीर मंगल घोष के क्रमानुसार जिनका प्रचण्ड ताण्डव हो रहा है, उन भगवान् शंकरकी जय हो ॥११॥ दृषद्विचित्रतल्पयोर्भुजंगमौक्तिकस्रजो- र्गरिष्ठरत्नलोष्ठयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः । तृणारविन्दचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोः समप्रवृत्तिकः कदासदाशिवं भजाम्यहम् ॥१२॥