भारतकोश
शिवमहिम्नः स्तोत्रम् (गन्धर्वराज पुष्पदन्त - सानुवाद सटीक)

शिवमहिम्नः स्तोत्रम् (गन्धर्वराज पुष्पदन्त - सानुवाद सटीक)

Shiva Mahimna Stotram with Hindi Commentary

गन्धर्वराज पुष्पदन्त / आचार्य राजेश दीक्षित द्वारा

DevanagariSanskritpublished35 पृष्ठ

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ॐ शिवमहिम्न स्तोत्रम् ★ महिम्नः पारन्ते परमविदुषो यद्यसदृशी । स्तुतिर्ब्रह्मादीनामपि तदवसन्नास्त्वयि गिरः ॥ अथावाच्यः सर्वः स्वमतिपरिमाणावधि गृणन् । ममाप्येष स्तोत्रे हर ! निरपवादः परिकरः ॥१॥ हे हर ! (सभी दुःखों के हरने वाले) आपकी महिमा के अन्त को न जानने वाले मुझ अज्ञानी द्वारा की गई स्तुति यदि आपकी महिमा के अनुकूल न हो, तो कोई आश्चर्य की बात नहीं है, क्योंकि ब्रह्मा आदि भी आपकी महिमा के अन्त को नहीं जानते हैं । अतः उनकी स्तुति भी आपके योग्य नहीं है । "स वाग् यथा तस्य गुणान् गृणीते" के अनुसार मेरी यथामति स्तुति उचित ही है । "नमः पतन्त्यात्मसमं पतत्रिणः" इस न्याय से मेरी स्तुति आरम्भ करना क्षम्य हो ॥ १ ॥ अतीतं पन्थानं तव च महिमा वाङ्मनसयो- रतद्व्यावृत्त्या यं चकितमभिधत्ते श्रुतिरपि ।

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