भारतकोश
शिवमहिम्नः स्तोत्रम् (गन्धर्वराज पुष्पदन्त - सानुवाद सटीक)

शिवमहिम्नः स्तोत्रम् (गन्धर्वराज पुष्पदन्त - सानुवाद सटीक)

Shiva Mahimna Stotram with Hindi Commentary

गन्धर्वराज पुष्पदन्त / आचार्य राजेश दीक्षित द्वारा

DevanagariSanskritpublished35 पृष्ठ

पृष्ठ 5, कुल 35 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 5

भाषा-टीका-सहितम् ३ अभव्यानामस्मिन्वरद रमणीयाममणीम् । विहन्तुं व्याक्रोशीं विदधत इहैके जडधियः ॥४॥ हे वरद ! आपके ऐसे ऐश्वर्य की—जो संसार की सृष्टि, रक्षा तथा प्रलय करने वाला है, तीनों वेदों द्वारा गाया गया है, तीनों गुणों (सत्, रज, तम) से परे है, एवं तीनों शक्तियों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) में व्याप्त है, कुछ नास्तिक लोग अनुचित निन्दा करते हैं। इससे उन्हीं का अधःपतन होता है, न कि आपके सुयश का ॥ ४ ॥ किमीहः किङ्कायः स खलु किमुपायस्त्रिभुवनम् । किमाधारो धाता सृजति किमुपादान इति च ॥ अतर्क्यैश्वर्येत्वय्यनवसरदुःस्थो हतधियः । कुतर्कोऽयं कांश्चिन्मुखरयति मोहाय जगतः ॥५॥ “अचिन्त्याः खलु ये भावा न तांस्तर्केण योजयेत्” के अनुसार कल्पना से बाहर, अपनी अलौकिक माया से सृष्टि करने वाले आपके ऐश्वर्य के विषय में नास्तिकों का यह कुतर्क कि वह ब्रह्मा सृष्टि कर्ता है, किन्तु उसकी इच्छा, शरीर, सहकारी कारण, आधार और समवायी कारण क्या है ? जगत् के कतिपय मन्द-मति वालों को भ्रान्ति करने वाला है ॥ ५ ॥