शिव पुराण
Shiva Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१४२ * संक्षिप्त शिवपुराण *
भी सदा जिनकी स्तुति करते हैं तथा जो परमानन्दस्वरूप हैं, उन भक्तवत्सल शम्भु शिवका मैं आवाहन करता हूँ।'
इस प्रकार साम्ब शिवका ध्यान करके उनके लिये आसन दे। चतुर्थ्यन्त पदसे ही क्रमशः सब कुछ अर्पित करे (यथा— साम्बाय सदाशिवाय नमः आसनं समर्पयामि—इत्यादि)। आसनके पश्चात् भगवान् शंकरको पाद्य और अर्घ्य दे। फिर परमात्मा शम्भुको आचमन कराकर पंचामृत-सम्बन्धी द्रव्योंद्वारा प्रसन्नतापूर्वक शंकरको स्नान कराये। वेदमन्त्रों अथवा समन्त्रक चतुर्थ्यन्त नामपदोंका उच्चारण करके भक्तिपूर्वक यथायोग्य समस्त द्रव्य भगवान्को अर्पित करे। अभीष्ट द्रव्यको शंकरके ऊपर चढ़ाये। फिर भगवान् शिवको वारुण-स्नान कराये। स्नानके पश्चात् उनके श्रीअंगोंमें सुगन्धित चन्दन तथा अन्य द्रव्योंका यत्नपूर्वक लेप करे। फिर सुगन्धित जलसे ही उनके ऊपर जलधारा गिराकर अभिषेक करे। वेदमन्त्रों, षडंगों अथवा शिवके ग्यारह नामोंद्वारा यथावकाश जलधारा चढ़ाकर वस्त्रसे शिवलिंगको अच्छी तरह पोंछे। फिर आचमनार्थ जल दे और वस्त्र समर्पित करे। नाना प्रकारके मन्त्रोंद्वारा भगवान् शिवको तिल, जौ, गेहूँ, मूँग और उड़द अर्पित करे। फिर पाँच मुखवाले परमात्मा शिवको पुष्प चढ़ाये। प्रत्येक मुखपर ध्यानके अनुसार यथोचित अभिलाषा करके कमल, शतपत्र, शंखपुष्प, कुशपुष्प, धत्तूर, मन्दार, द्रोणपुष्प (गूमा), तुलसीदल तथा बिल्वपत्र चढ़ाकर पराभक्तिके साथ भक्तवत्सल भगवान् शंकरकी विशेष पूजा करे। अन्य सब वस्तुओंका अभाव होनेपर शिवको केवल बिल्वपत्र ही अर्पित करे। बिल्वपत्र समर्पित होनेसे ही शिवकी पूजा सफल होती है। तत्पश्चात् सुगन्धित चूर्ण तथा सुवासित उत्तम तैल (इत्र आदि) विविध वस्तुएँ बड़े हर्षके साथ भगवान् शिवको अर्पित करे। फिर प्रसन्नतापूर्वक गुग्गुल और अगुरु आदिकी धूप निवेदन करे। तदनन्तर शंकरजीको घीसे भरा हुआ दीपक दे। इसके बाद निम्नांकित मन्त्रसे भक्तिपूर्वक पुनः अर्घ्य दे और भावभक्तिसे वस्त्रद्वारा उनके मुखका मार्जन करे।
अर्घ्यमन्त्र
रूपं देहि यशो देहि भोगं देहि च शङ्कर।
भुक्तिमुक्तिफलं देहि गृहीत्वार्घ्यं नमोऽस्तु ते॥
'प्रभो! शंकर! आपको नमस्कार है। आप इस अर्घ्यको स्वीकार करके मुझे रूप दीजिये, यश दीजिये, भोग दीजिये तथा भोग और मोक्षरूपी फल प्रदान कीजिये।'
इसके बाद भगवान् शिवको भाँति-भाँतिके उत्तम नैवेद्य अर्पित करे। नैवेद्यके