भारतकोश
शिव पुराण

शिव पुराण

Shiva Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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* रुद्रसंहिता * । १४३

पश्चात् प्रेमपूर्वक आचमन कराये। तदनन्तर सांगोपांग ताम्बूल बनाकर शिवको समर्पित करे। फिर पाँच बत्तीकी आरती बनाकर भगवान्‌को दिखाये। उसकी संख्या इस प्रकार है—पैरोंमें चार बार, नाभिमण्डलके सामने दो बार, मुखके समक्ष एक बार तथा सम्पूर्ण अंगोंमें सात बार आरती दिखाये। तत्पश्चात् नाना प्रकारके स्तोत्रोंद्वारा प्रेमपूर्वक भगवान् वृषभध्वजकी स्तुति करे। तदनन्तर धीरे-धीरे शिवकी परिक्रमा करे। परिक्रमाके बाद भक्त पुरुष साष्टांग प्रणाम करे और निम्नांकित मन्त्रसे भक्तिपूर्वक पुष्पांजलि दे—

पुष्पांजलिमन्त्र

अज्ञानाद्यदि वा ज्ञानाद्यत्पूजादिकं मया।
कृतं तदस्तु सफलं कृपया तव शङ्कर॥
तावकस्त्वद्गतप्राणस्त्वच्चित्तोऽहं सदा मृड।
इति विज्ञाय गौरीश भूतनाथ प्रसीद मे॥
भूमौ स्खलितपादानां भूमिरेवावलम्बनम्।
त्वयि जातापराधानां त्वमेव शरणं प्रभो॥
(अध्याय १३)

'शंकर! मैंने अज्ञानसे या जान-बूझकर जो पूजन आदि किया है, वह आपकी कृपासे सफल हो। मृड! मैं आपका हूँ, मेरे प्राण सदा आपमें लगे हुए हैं, मेरा चित्त सदा आपका ही चिन्तन करता है—ऐसा जानकर हे गौरीनाथ! भूतनाथ! आप मुझपर प्रसन्न होइये। प्रभो! धरतीपर जिनके पैर लड़खड़ा जाते हैं, उनके लिये भूमि ही सहारा है; उसी प्रकार जिन्होंने आपके प्रति अपराध किये हैं उनके लिये भी आप ही शरणदाता हैं।'

—इत्यादि रूपसे बहुत-बहुत प्रार्थना करके उत्तम विधिसे पुष्पांजलि अर्पित करनेके पश्चात् पुनः भगवान्‌को नमस्कार करे। फिर निम्नांकित मन्त्रसे विसर्जन करना चाहिये।

विसर्जन

स्वस्थानं गच्छ देवेश परिवारयुतः प्रभो।
पूजाकाले पुनर्नाथ त्वयाऽऽगन्तव्यमादरात्॥

'देवेश्वर प्रभो! अब आप परिवारसहित अपने स्थानको पधारें। नाथ! जब पूजाका समय हो, तब पुनः आप यहाँ सादर पदार्पण करें।'

इस प्रकार भक्तवत्सल शंकरकी बारंबार प्रार्थना करके उनका विसर्जन करे और उस जलको अपने हृदयमें लगाये तथा मस्तकपर चढ़ाये।

ऋषियो! इस तरह मैंने शिवपूजनकी सारी विधि बता दी, जो भोग और मोक्ष देनेवाली है। अब और क्या सुनना चाहते हो? (अध्याय १३)


विभिन्न पुष्पों, अन्नों तथा जलादिकी धाराओंसे शिवजीकी पूजाका माहात्म्य

ब्रह्माजी बोले—नारद! जो लक्ष्मी-प्राप्तिकी इच्छा करता हो, वह कमल, बिल्वपत्र, शतपत्र और शंखपुष्पसे भगवान् शिवकी पूजा करे। ब्रह्मन्! यदि एक लाखकी संख्यामें इन पुष्पोंद्वारा भगवान् शिवकी पूजा सम्पन्न हो जाय तो सारे पापोंका नाश होता है और लक्ष्मीकी भी प्राप्ति हो जाती है, इसमें संशय नहीं है। प्राचीन पुरुषोंने बीस कमलोंका एक प्रस्थ बताया है। एक सहस्र बिल्वपत्रोंको भी

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