शिव पुराण

शिव पुराण
Shiva Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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(११)
| विषय | पृष्ठ-संख्या |
|---|---|
| १२- भगवान् शिवके द्विजेश्वरावतारकी कथा- राजा भद्रायु तथा रानी कीर्तिमालिनीकी धार्मिक दृढ़ताकी परीक्षा | ४६८ |
| १३- भगवान् शिवका यतिनाथ एवं हंस नामक अवतार | ४७१ |
| १४- भगवान् शिवके कृष्णदर्शन नामक अवतारकी कथा | ४७२ |
| १५- भगवान् शिवके अवधूतेश्वरावतारकी कथा और उसकी महिमाका वर्णन | ४७५ |
| १६- भगवान् शिवके भिक्षुवर्यावतारकी कथा, राजकुमार और द्विजकुमारपर कृपा | ४७७ |
| १७- शिवके सुरेश्वरावतारकी कथा, उपमन्युकी तपस्या और उन्हें उत्तम वरकी प्राप्ति | ४८० |
| १८- शिवजीके किरातावतारके प्रसंगमें श्रीकृष्णद्वारा द्वैतवनमें दुर्वासाके शापसे पाण्डवोंकी रक्षा, व्यासजीका अर्जुनको शस्त्रविद्या और पार्थिव-पूजनकी विधि बताकर तपके लिये सम्मति देना, अर्जुनका इन्द्रकील पर्वतपर तप, इन्द्रका आगमन और अर्जुनको वरदान, अर्जुनका शिवजीके उद्देश्यसे पुनः तपमें प्रवृत्त होना | ४८२ |
| १९- किरातावतारके प्रसंगमें मूक नामक दैत्यका शूकररूप धारण करके अर्जुनके पास आना, शिवजीका किरातवेषमें प्रकट होना और अर्जुन तथा किरातवेषधारी शिवद्वारा उस दैत्यका वध | ४८५ |
| २०- अर्जुन और शिवदूतका वार्तालाप, किरातवेषधारी शिवजीके साथ अर्जुनका युद्ध, पहचाननेपर अर्जुनद्वारा शिव-स्तुति, शिवजीका अर्जुनको वरदान देकर अन्तर्धान होना, अर्जुनका आश्रमपर लौटकर भाइयोंसे मिलना, श्रीकृष्णका अर्जुनसे मिलनेके लिये वहाँ पधारना | ४८७ |
| २१- शिवजीके द्वादश ज्योतिर्लिंगावतारोंका सविस्तर वर्णन | ४९३ |
| कोटिरुद्रसंहिता | |
| १- द्वादश ज्योतिर्लिंगों तथा उनके उपलिंगोंका वर्णन एवं उनके दर्शन-पूजनकी महिमा | ४९७ |
| २- काशी आदिके विभिन्न लिंगोंका वर्णन तथा अत्रीश्वरकी उत्पत्तिके प्रसंगमें गंगा और शिवके अत्रिके तपोवनमें नित्य निवास करनेकी कथा | ५०० |
| ३- ऋषिकापर भगवान् शिवकी कृपा, एक असुरसे उसके धर्मकी रक्षा करके उसके आश्रममें 'नन्दिकेश' नामसे निवास करना और वर्षमें एक दिन गंगाका भी वहाँ आना | ५०१ |
| ४- प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथके प्रादुर्भावकी कथा और उसकी महिमा | ५०३ |
| विषय | पृष्ठ-संख्या |
|---|---|
| ५- मल्लिकार्जुन और महाकाल नामक ज्योतिर्लिंगोंके आविर्भावकी कथा तथा उनकी महिमा | ५०५ |
| ६- महाकालके माहात्म्यके प्रसंगमें शिवभक्त राजा चन्द्रसेन तथा गोप-बालक श्रीकरकी कथा | ५०७ |
| ७- विन्ध्यकी तपस्या, ओंकारमें परमेश्वरलिंगके प्रादुर्भाव और उसकी महिमाका वर्णन | ५११ |
| ८- केदारेश्वर तथा भीमशंकर नामक ज्योतिर्लिंगोंके आविर्भावकी कथा तथा उनके माहात्म्यका वर्णन | ५१३ |
| ९- विश्वेश्वर ज्योतिर्लिंग और उनकी महिमाके प्रसंगमें पंचक्रोशीकी महत्ताका प्रतिपादन | ५१७ |
| १०- वाराणसी तथा विश्वेश्वरका माहात्म्य | ५२० |
| ११- त्र्यम्बक ज्योतिर्लिंगके प्रसंगमें महर्षि गौतमके द्वारा किये गये परोपकारकी कथा, उनका तपके प्रभावसे अक्षय जल प्राप्त करके ऋषियोंकी अनावृष्टिके कष्टसे रक्षा करना; ऋषियोंका छलपूर्वक उन्हें गोहत्यामें फँसाकर आश्रमसे निकालना और शुद्धिका उपाय बताना | ५२२ |
| १२- पत्नीसहित गौतमकी आराधनासे संतुष्ट हो भगवान् शिवका उन्हें दर्शन देना, गंगाको वहाँ स्थापित करके स्वयं भी स्थिर होना, देवताओंका वहाँ बृहस्पतिके सिंहराशिपर आनेपर गंगाजीके विशेष माहात्म्यको स्वीकार करना, गंगाका गौतमी (या गोदावरी) नामसे और शिवका त्र्यम्बक ज्योतिर्लिंगके नामसे विख्यात होना तथा इन दोनोंकी महिमा | ५२५ |
| १३- वैद्यनाथेश्वर ज्योतिर्लिंगके प्राकट्यकी कथा तथा महिमा | ५२८ |
| १४- नागेश्वर नामक ज्योतिर्लिंगका प्रादुर्भाव और उसकी महिमा | ५३० |
| १५- रामेश्वर नामक ज्योतिर्लिंगके आविर्भाव तथा माहात्म्यका वर्णन | ५३२ |
| १६- घुश्माकी शिवभक्तिसे उसके मरे हुए पुत्रका जीवित होना, घुश्मेश्वर शिवका प्रादुर्भाव तथा उनकी महिमाका वर्णन | ५३४ |
| १७- शंकरजीकी आराधनासे भगवान् विष्णुको सुदर्शन चक्रकी प्राप्ति तथा उसके द्वारा दैत्योंका संहार | ५३८ |
| १८- भगवान् विष्णुद्वारा पठित शिवसहस्रनाम-स्तोत्र | ५३९ |
| १९- भगवान् शिवको संतुष्ट करनेवाले व्रतोंका वर्णन, शिवरात्रि-व्रतकी विधि एवं महिमाका कथन | ५६२ |
| २०- शिवरात्रि-व्रतके उद्यापनकी विधि | ५६७ |
| २१- अनजानमें शिवरात्रि-व्रत करनेसे एक भीलपर भगवान् शंकरकी अद्भुत कृपा | ५६८ |