शिव पुराण

शिव पुराण
Shiva Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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( १२ )
| विषय | पृष्ठ-संख्या |
|---|---|
| २२- मुक्ति और भक्तिके स्वरूपका विवेचन ......... | ५७४ |
| २३- शिव, विष्णु, रुद्र और ब्रह्माके स्वरूपका विवेचन ..................................................... | ५७५ |
| २४- शिवसम्बन्धी तत्त्वज्ञानका वर्णन तथा उसकी महिमा, कोटिरुद्रसंहिताका माहात्म्य एवं उपसंहार...................................................... | ५७७ |
| उमासंहिता | |
| १- भगवान् श्रीकृष्णके तपसे संतुष्ट हुए शिव और पार्वतीका उन्हें अभीष्ट वर देना तथा शिवकी महिमा........................................................... | ५८० |
| २- नरकमें गिरानेवाले पापोंका संक्षिप्त परिचय... | ५८२ |
| ३- पापियों और पुण्यात्माओंकी यमलोकयात्रा... | ५८४ |
| ४- नरकोंकी अट्ठाईस कोटियों तथा प्रत्येकके पाँच-पाँच नायकके क्रमसे एक सौ चालीस रौरवादि नरकोंकी नामावली .................................... | ५८६ |
| ५- विभिन्न पापोंके कारण मिलनेवाली नरकयातनाका वर्णन तथा कुक्कुरबलि, काकबलि एवं देवता आदिके लिये दी हुई बलिकी आवश्यकता एवं महत्ताका प्रतिपादन........................................ | ५८८ |
| ६- यमलोकके मार्गमें सुविधा प्रदान करनेवाले विविध दानोंका वर्णन................................... | ५९० |
| ७- जलदान, जलाशय-निर्माण, वृक्षारोपण, सत्य-भाषण और तपकी महिमा........................... | ५९२ |
| ८- वेद और पुराणोंके स्वाध्याय तथा विविध प्रकारके दानकी महिमा, नरकोंका वर्णन तथा उनमें गिरानेवाले पापोंका दिग्दर्शन, पापोंके लिये सर्वोत्तम प्रायश्चित्त शिवस्मरण तथा ज्ञानके महत्त्वका प्रतिपादन....................................... | ५९४ |
| ९- मृत्युकाल निकट आनेके कौन-कौनसे लक्षण हैं, इसका वर्णन... .................................... | ५९७ |
| १०- कालको जीतनेका उपाय, नवधा शब्दब्रह्म एवं तुंकारके अनुसंधान और उससे प्राप्त होनेवाली सिद्धियोंका वर्णन... .................................... | ५९९ |
| ११- काल या मृत्युको जीतकर अमरत्व प्राप्त करनेकी चार यौगिक साधनाएँ—प्राणायाम, भ्रूमध्यमें अग्निका ध्यान, मुखसे वायुपान तथा मुड़ी हुई जिह्वाद्वारा गलेकी घाटीका स्पर्श...................... | ६०१ |
| १२- भगवती उमाके कालिका-अवतारकी कथा—समाधि और सुरथके समक्ष मेधाका देवीकी कृपासे मधुकैटभके वधका प्रसंग सुनाना... ... | ६०३ |
| १३- सम्पूर्ण देवताओंके तेजसे देवीका महालक्ष्मीरूपमें अवतार और उनके द्वारा महिषासुरका वध ... | ६०७ |
| १४- देवी उमाके शरीरसे सरस्वतीका आविर्भाव, उनके रूपकी प्रशंसा सुनकर शुम्भका उनके पास दूत भेजना, दूतके निराश लौटनेपर शुम्भका क्रमशः धूम्रलोचन, चण्ड, मुण्ड तथा |
| विषय | पृष्ठ-संख्या |
|---|---|
| रक्तबीजको भेजना और देवीके द्वारा उन सबका मारा जाना... .................................... | ६१० |
| १५- देवीके द्वारा सेना और सेनापतियोंसहित निशुम्भ एवं शुम्भका संहार.......................... | ६१३ |
| १६- देवताओंका गर्व दूर करनेके लिये तेजः-पुंजरूपिणी उमाका प्रादुर्भाव... ...................... | ६१६ |
| १७- देवीके द्वारा दुर्गमासुरका वध तथा उनके दुर्गा, शताक्षी, शाकम्भरी और भ्रामरी आदि नाम पड़नेका कारण... ........................................ | ६१९ |
| १८- देवीके क्रियायोगका वर्णन—देवीकी मूर्ति एवं मन्दिरके निर्माण, स्थापन और पूजनका महत्त्व, परा अम्बाकी श्रेष्ठता, विभिन्न मासों और तिथियोंमें देवीके व्रत, उत्सव और पूजन आदिके फल तथा इस संहिताके श्रवण एवं पाठकी महिमा... ................................... | ६२२ |
| कैलाससंहिता | |
| १- ऋषियोंका सूतजीसे तथा वामदेवजीका स्कन्दसे प्रश्न—प्रणवार्थ-निरूपणके लिये अनुरोध... ... | ६२६ |
| २- प्रणवके वाच्यार्थरूप सदाशिवके स्वरूपका ध्यान, वर्णाश्रम-धर्मके पालनका महत्त्व, ज्ञानमयी पूजा, संन्यासके पूर्वाङ्गभूत नान्दीश्राद्ध एवं ब्रह्मयज्ञ आदिका वर्णन... ............................. | ६३० |
| ३- संन्यासग्रहणकी शास्त्रीय विधि—गणपति-पूजन, होम, तत्त्व-शुद्धि, सावित्री-प्रवेश, सर्वसंन्यास और दण्ड-धारण आदिका प्रकार... | ६३६ |
| ४- प्रणवके अर्थोंका विवेचन... ........................... | ६४३ |
| ५- शैवदर्शनके अनुसार शिवतत्त्व, जगत्-प्रपंच और जीवतत्त्वके विषयमें विशद विवेचन तथा शिवसे जीव और जगत्की अभिन्नताका प्रतिपादन... | ६४५ |
| ६- महावाक्योंके अर्थपर विचार तथा संन्यासियोंके योगपट्टका प्रकार... .................................... | ६५० |
| ७- यतिके अन्त्येष्टिकर्मकी दशाहपर्यन्त विधिका वर्णन.......................................................... | ६५४ |
| ८- यतिके लिये एकादशाह-कृत्यका वर्णन........ | ६५८ |
| ९- यतिके द्वादशाह-कृत्यका वर्णन, स्कन्द और वामदेवका कैलास पर्वतपर जाना तथा सूतजीके द्वारा इस संहिताका उपसंहार........................ | ६६० |
| वायवीयसंहिता ( पूर्वखण्ड ) | |
| १- प्रयागमें ऋषियोंद्वारा सम्मानित सूतजीके द्वारा कथाका आरम्भ, विद्यास्थानों एवं पुराणोंका परिचय तथा वायुसंहिताका प्रारम्भ... ........... | ६६३ |
| २- ऋषियोंका ब्रह्माजीके पास जा उनकी स्तुति करके उनसे परमपुरुषके विषयमें प्रश्न करना और ब्रह्माजीका आनन्दमग्न हो ‘रुद्र’ कहकर उत्तर देना... .................................... | ६६५ |
| ३- ब्रह्माजीके द्वारा परमतत्त्वके रूपमें भगवान् शिवकी |