शिव पुराण
Shiva Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२९२ * संक्षिप्त शिवपुराण *
साथ रखते हैं। उनके एक-दो नहीं, दस भुजाएँ हैं। देवि! मैं समझ नहीं पाता कि किस कारणसे तुम उन्हें अपना पति बनाना चाहती हो। तुम्हारा ज्ञान कहाँ चला गया, इस बातको आज सोच-विचारकर मुझे बताओ। दक्षने अपने यज्ञमें अपनी ही पुत्री सतीको केवल यही सोचकर नहीं बुलाया कि वह कपालधारी भिक्षुककी भार्या है। इतना ही नहीं, उन्होंने यज्ञमें भाग देनेके लिये सब देवताओंको बुलाया, किंतु शम्भुको छोड़ दिया। सती उसी अपमानके कारण अत्यन्त क्रोधसे व्याकुल हो उठी। उसने अपने प्यारे प्राणोंको तो छोड़ा ही; शंकरजीको भी त्याग दिया।
'तुम तो स्त्रियोंमें रत्न हो, तुम्हारे पिता समस्त पर्वतोंके राजा हैं, फिर तुम क्यों इस उग्र तपस्याके द्वारा वैसे पतिको पानेकी अभिलाषा करती हो? सोनेकी मुद्रा (अशर्फी) देकर बदलेमें उतना ही बड़ा काँच लेना चाहती हो? उज्ज्वल चन्दन छोड़कर अपने अंगोंमें कीचड़ लपेटना चाहती हो? सूर्यके तेजका परित्याग करके जुगनूकी चमक पाना चाहती हो? महीन वस्त्र त्यागकर अपने शरीरको चमड़ेसे ढकनेकी इच्छा करती हो? घरमें रहना छोड़कर वनमें धूनी रमाना चाहती हो? तथा देवेश्वरि! यदि तुम इन्द्र आदि लोकपालोंको त्यागकर शिवके प्रति अनुरक्त हो तो अवश्य ही रत्नोंके उत्तम भंडारको त्यागकर लोहा पानेकी इच्छा करती हो। लोकमें इस बातको अच्छा नहीं कहा गया है। शिवके साथ तुम्हारा सम्बन्ध मुझे इस समय परस्परविरुद्ध दिखायी देता है। कहाँ तुम, जिसके नेत्र प्रफुल्ल कमलदलके समान शोभा पाते हैं और कहाँ वे रुद्र, जो तीन भद्दी आँखें धारण करते हैं। तुम तो चन्द्रमुखी* हो और शिव पंचमुख कहे गये हैं। तुम्हारे सिरपर दिव्य वेणी सर्पिणी-सी शोभा पा रही है; परंतु शिवके मस्तकपर जो जटाजूट बताया जाता है, वह प्रसिद्ध ही है। तुम्हारे अंगमें चन्दनका अंगराग होगा और शिवके शरीरमें चिताका भस्म! कहाँ तुम्हारी सुन्दर मृदुल साड़ी और कहाँ शंकरजीके उपयोगमें आनेवाली हाथीकी खाल? कहाँ तुम्हारे अंगोंमें दिव्य आभूषण और कहाँ शंकरके सर्वांगमें लिपटे हुए सर्प? कहाँ तुम्हारी सेवाके लिये उद्यत रहनेवाले सम्पूर्ण देवता और कहाँ भूतोंकी दी हुई बलिको पसंद करनेवाले शिव? कहाँ तो मृदंगकी मधुर ध्वनि और कहाँ डमरूकी डिमडिम? कहाँ भेरियोंके समूहकी गड़गड़ाहट और कहाँ अशुभ शृंगीनाद? कहाँ ढक्काका शब्द और कहाँ अशुभ गलनाद? तुम्हारा यह उत्तम रूप शिवके योग्य कदापि नहीं है। यदि उनके पास धन होता तो वे दिगम्बर (नंगे) क्यों रहते? सवारीके नामपर उनके पास एक बूढ़ा बैल है और दूसरी कोई भी सामग्री उनके पास नहीं है। कन्याके लिये ढूँढ़े
* अंकोंकी संज्ञाओंमें चन्द्रमाको एक संख्याका बोधक माना गया है। एक मुखवाले पुरुष और स्त्रियाँ ही सुन्दर माने जाते हैं, एकसे अधिक मुखवाले नहीं। इस प्रकार एकमुख और पंचमुखकी भी तुलना की गयी है। 'चन्द्रमुखी' पदका दूसरा भाव है—तुम्हारा मुख चन्द्रमाके समान मनोहर है और वे पंचानन सिंहके समान भयंकर हैं।
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