शिव पुराण
Shiva Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३१० * संक्षिप्त शिवपुराण *
हिमवान्का भगवान् शिवके पास लग्नपत्रिका भेजना, विवाहके लिये आवश्यक सामान जुटाना, मंगलाचारका आरम्भ करना, उनका निमन्त्रण पाकर पर्वतों और नदियोंका दिव्यरूपमें आना, पुरीकी सजावट तथा विश्वकर्माद्वारा दिव्यमण्डप एवं देवताओंके निवासके लिये दिव्यलोकोंका निर्माण करवाना
नारदजीने पूछा—तात! महाप्राज्ञ! प्रभो! आप कृपापूर्वक यह बताइये कि सप्तर्षियोंके चले जानेपर हिमाचलने क्या किया।
ब्रह्माजीने कहा—मुनीश्वर! अरुन्धती-सहित उन सप्तर्षियोंके चले जानेपर हिमवान्ने जो कार्य किया, वह तुम्हें बता रहा हूँ। सप्तर्षियोंके जानेके बाद अपने मेरु आदि भाई-बन्धुओंको आमन्त्रित करके पुत्र और पत्नीसहित महामनस्वी गिरिराज हिमवान् बड़े हर्षका अनुभव करने लगे। तदनन्तर ऋषियोंकी आज्ञाके अनुसार हिमवान्ने अपने पुरोहित गर्गजीसे बड़ी प्रसन्नताके साथ लग्न-पत्रिका लिखवायी। उस पत्रिकाको उन्होंने भगवान् शिवके पास भेजा। पर्वतराजके बहुत-से आत्मीयजन प्रसन्नमनसे नाना प्रकारकी सामग्रियाँ लेकर वहाँ गये। कैलासपर भगवान् शिवके समीप पहुँचकर उन लोगोंने शिवको तिलक लगाया और वह लग्नपत्र उनके हाथमें दिया। वहाँ भगवान् शिवने उन सबका यथायोग्य विशेष सत्कार किया। फिर वे सब लोग प्रसन्नचित्त हो शैलराजके पास लौट आये। महेश्वरके द्वारा विशेष सम्मानित होकर बड़े हर्षके साथ लौटे हुए उन लोगोंको देखकर हिमवान्के हृदयमें अत्यन्त हर्ष हुआ। तत्पश्चात् आनन्दित हो शैलराजने नाना देशोंमें रहनेवाले अपने बन्धुओंको लिखित निमन्त्रण भेजा, जो उन सबको सुख देनेवाला था। इसके बाद वे बड़े आदर और उत्साहके साथ उत्तम अन्न एवं नाना प्रकारकी विवाहोचित सामग्रियोंका संग्रह करने लगे। उन्होंने चावल, गुड़, शक्कर, आटा, दूध, दही, घी, मिठाई, नमकीन पदार्थ, मक्खन, पकवान, महान् स्वादिष्ट रस और नाना प्रकारके व्यंजन इतने अधिक एकत्र किये कि सूखे पदार्थोंके पहाड़ खड़े हो गये और द्रव पदार्थोंकी बावड़ियाँ बन गयीं। शिवके पार्षदों और देवताओंके लिये हितकर नाना प्रकारकी वस्तुएँ, भाँति-भाँतिके बहुमूल्य वस्त्र, आगमें तपाकर शुद्ध किये हुए सुवर्ण, रजत और विभिन्न प्रकारके मणिरत्न—इनका तथा अन्य उपयोगी द्रव्योंका विधिपूर्वक संग्रह करके गिरिराजने मंगलकारी दिनमें मांगलिक कृत्य करना आरम्भ किया। पर्वतराजके घरकी स्त्रियोंने पार्वतीका संस्कार करवाया। भाँति-भाँतिके आभूषणोंसे विभूषित हुई राजभवनकी उन सुन्दरी स्त्रियोंने सानन्द मंगलकार्यका सम्पादन किया। नगरके ब्राह्मणोंकी स्त्रियोंने स्वयं बड़े हर्षके साथ लोकाचारका अनुष्ठान किया। उसमें मंगलपूर्वक भाँति-भाँतिके उत्सव मनाये गये। हर्षभरे हृदयसे उत्तम मंगलाचारका