भारतकोश
शिव पुराण

शिव पुराण

Shiva Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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पृष्ठ 404

३९० * संक्षिप्त शिवपुराण *

सर्वदा उत्तम-उत्तम स्थानोंपर चिरकालतक यथेष्ट विहार कर। शरीरान्त होनेपर यह पुनः गोलोकमें श्रीकृष्णको ही प्राप्त होगा और इसकी मृत्यु हो जानेपर तू भी वैकुण्ठमें चतुर्भुज भगवान्‌को प्राप्त करेगी।

सनत्कुमारजी कहते हैं—मुने! इस प्रकार आशीर्वाद देकर ब्रह्मा अपने धामको चले गये। तब दानव शंखचूडने गान्धर्व विवाहकी विधिसे तुलसीका पाणिग्रहण किया। यों तुलसीके साथ विवाह करके वह अपने पिताके स्थानको चला गया और मनोरम भवनमें उस रमणीके साथ विहार करने लगा।

(अध्याय १३—२९)


शंखचूडका असुरराज्यपर अभिषेक और उसके द्वारा देवोंका अधिकार छीना जाना, देवोंका ब्रह्माकी शरणमें जाना, ब्रह्माका उन्हें साथ लेकर विष्णुके पास जाना, विष्णुद्वारा शंखचूडके जन्मका रहस्योद्घाटन और फिर सबका शिवके पास जाना और शिवसभामें उनकी झाँकी करना तथा अपना अभिप्राय प्रकट करना

सनत्कुमारजी कहते हैं—महर्षे! जब शंखचूडने तप करके वर प्राप्त कर लिया और वह विवाहित होकर अपने घर लौट आया, तब दानवों और दैत्योंको बड़ी प्रसन्नता हुई। वे सभी असुर तुरंत ही अपने लोकसे निकलकर अपने गुरु शुक्राचार्यको साथ ले दल बनाकर उसके निकट आये और विनयपूर्वक उसे प्रणाम करके अनेकों प्रकारसे आदर प्रदर्शित करते हुए उसका स्तवन करने लगे। फिर उसे अपना तेजस्वी स्वामी मानकर अत्यन्त प्रेमभावसे उसके पास ही खड़े हो गये। उधर दम्भकुमार शंखचूडने भी अपने कुलगुरु शुक्राचार्यको आया हुआ देखकर बड़े आदर और भक्तिके साथ उन्हें साष्टांग प्रणाम किया। तदनन्तर गुरु शुक्राचार्यने समस्त असुरोंके साथ सलाह करके उनकी सम्मतिसे शंखचूडको दानवों तथा असुरोंका अधिपति बना दिया। दम्भपुत्र शंखचूड प्रतापी एवं वीर तो था ही, उस समय असुर-राज्यपरअभिषिक्त होनेके कारण वह असुरराज विशेष-रूपसे शोभा पाने लगा। तब उसने सहसा देवताओंपर आक्रमण करके वेगपूर्वक उनका संहार करना आरम्भ किया। सम्पूर्ण देवता मिलकर भी उसके उत्कृष्ट तेजको सहन न कर सके, अतः वे समरभूमिसे भाग चले और दीन होकर यत्र-तत्र पर्वतोंकी खोहोंमें जा छिपे। उनकी स्वतन्त्रता जाती रही। वे शंखचूडके वशवर्ती होनेके कारण प्रभाहीन हो गये। इधर शूरवीर प्रतापी दम्भकुमार दानवराज शंखचूडने भी सम्पूर्ण लोकोंको जीतकर देवताओंका सारा अधिकार छीन लिया। वह त्रिलोकी-को अपने अधीन करके सम्पूर्ण लोकोंपर शासन करने लगा और स्वयं इन्द्र बनकर सारे यज्ञभागोंको भी हड़पने लगा तथा अपनी शक्तिसे कुबेर, सोम, सूर्य, अग्नि, यम और वायु आदिके अधिकारोंका