शिव पुराण
Shiva Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें* शतरुद्रसंहिता * | ४७९
नियमको समाप्त किये बिना ही राजाने रातमें भोजन भी कर लिया। इसी प्रकार राजकुमार भी प्रदोषकालमें शिवजीकी पूजा किये बिना ही भोजन करके सो गया। वही राजा दूसरे जन्ममें विदर्भराज हुआ था। शिवजीकी पूजामें विघ्न होनेके कारण शत्रुओंने उसको सुख-भोगके बीचमें ही मार डाला। पूर्वजन्ममें जो उसका पुत्र था, वही इस जन्ममें भी हुआ है। शिवजीकी पूजाका उल्लंघन करनेके कारण यह दरिद्रताको प्राप्त हुआ है। इसकी माताने पूर्वजन्ममें छलसे अपनी सौतको मार डाला था। उस महान् पापके कारण ही वह इस जन्ममें ग्राहके द्वारा मारी गयी। ब्राह्मणी! यह तुम्हारा पुत्र पूर्वजन्ममें उत्तम ब्राह्मण था। इसने सारी आयु केवल दान लेनेमें बितायी है, यज्ञ आदि सत्कर्म नहीं किये हैं। इसीलिये यह दरिद्रताको प्राप्त हुआ है। उस दोषका निवारण करनेके लिये अब तुम भगवान् शंकरकी शरणमें जाओ। ये दोनों बालक यज्ञोपवीत-संस्कारके पश्चात् भगवान् शिवकी आराधना करें। भगवान् शिव इनका कल्याण करेंगे।
इस प्रकार ब्राह्मणीको उपदेश देकर भिक्षु (श्रेष्ठ संन्यासी)-का शरीर धारण करनेवाले भक्तवत्सल शिवने उसे अपने उत्तम स्वरूपका दर्शन कराया। उन्हें साक्षात् शिव जानकर ब्राह्मणपत्नीने प्रणाम किया और प्रेमसे गद्गदवाणीद्वारा उनकी स्तुति की। तत्पश्चात् भगवान् शिव वहीं अन्तर्धान हो गये। उनके चले जानेपर ब्राह्मणी उस बालकको लेकर अपने पुत्रके साथ घरको चली गयी। एकचक्रा नामके सुन्दर ग्राममें उसने घर बना रखा था। वह उत्तम अन्नसे अपने बेटे तथा राजकुमारका भी पालन-पोषण करने लगी। यथासमय ब्राह्मणोंने उन दोनोंका यज्ञोपवीत-संस्कार कर दिया। वे दोनों शिवकी पूजामें तत्पर रहते हुए घरपर ही बड़े हुए। शाण्डिल्य मुनिके उपदेशसे नियमपरायण हो वे दोनों शुभ व्रत रखकर प्रदोषकालमें शंकरजीकी पूजा करते थे। एक दिन द्विजकुमार राजकुमारको साथ लिये बिना ही नदीमें स्नान करनेके लिये गया। वहाँ उसे निधिसे भरा हुआ एक सुन्दर कलश मिल गया। इस प्रकार भगवान् शंकरकी पूजा करते हुए उन दोनों कुमारोंका उसी घरमें एक वर्ष व्यतीत हो गया। तदनन्तर एक दिन राजकुमार उस ब्राह्मणकुमारके साथ वनमें गया। वहाँ अकस्मात् एक गन्धर्वकन्या आ गयी। उसके पिताने वह कन्या राजकुमारको दे दी। गन्धर्व-कन्यासे विवाह करके राजकुमार निष्कण्टक राज्य भोगने लगे। जिस ब्राह्मणपत्नीने पहले अपने पुत्रकी भाँति उसका पालन-पोषण किया था, वही उस समय राजमाता हुई और वह ब्राह्मणकुमार