शिव पुराण
Shiva Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४९६ * संक्षिप्त शिवपुराण *
देवशैलके निकटवर्ती एक सरोवरमें प्रकट हुए। मुने! घुश्माके पुत्रको सुदेहने मार डाला था। (उसे जीवित करनेके लिये घुश्माने शिवजीकी आराधना की।) तब उनकी भक्तिसे संतुष्ट होकर भक्तवत्सल शम्भुने उनके पुत्रको बचा लिया। तदनन्तर कामनाओंके पूरक शम्भु घुश्माकी प्रार्थनासे उस तड़ागमें ज्योतिर्लिंगरूपसे स्थित हो गये! उस समय उनका नाम घुश्मेश्वर हुआ। जो मनुष्य उस शिवलिंगका भक्ति-पूर्वक दर्शन तथा पूजन करता है, वह इस लोकमें सम्पूर्ण सुखोंको भोगकर अन्तमें मुक्ति-लाभ करता है। सनत्कुमारजी! इस प्रकार मैंने तुमसे इस बारह दिव्य ज्योतिर्लिंगोंका वर्णन किया। ये सभी भोग और मोक्षके प्रदाता हैं। जो मनुष्य ज्योतिर्लिंगोंकी इस कथाको पढ़ता अथवा सुनता है, वह सम्पूर्ण पापोंसे मुक्त हो जाता है तथा भोग-मोक्षको प्राप्त करता है। इस प्रकार मैंने इस शतरुद्रनामकी संहिताका वर्णन कर दिया। यह शिवके सौ अवतारोंकी उत्तम कीर्तिसे सम्पन्न तथा सम्पूर्ण अभीष्ट फलोंको देनेवाली है। जो मनुष्य इसे नित्य समाहितचित्तसे पढ़ता अथवा सुनता है, उसकी सारी लालसाएँ पूर्ण हो जाती हैं और अन्तमें उसे निश्चय ही मुक्ति मिल जाती है।
(अध्याय ४२)
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॥ शतरुद्रसंहिता सम्पूर्ण ॥
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