भारतकोश
शिव पुराण

शिव पुराण

Shiva Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished850 पृष्ठ

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पृष्ठ 509

* शतरुद्रसंहिता * ४९५

पूजा करते हैं। जो काशी-विश्वनाथके भक्त हैं और नित्य उनके नामोंका जप करते रहते हैं, वे कर्मोंसे निर्लिप्त होकर कैवल्यपदके भागी होते हैं। चन्द्रशेखर शिवका जो त्र्यम्बक नामक आठवाँ अवतार है, वह गौतम ऋषिके प्रार्थना करनेपर गौतमी नदीके तटपर प्रकट हुआ था। गौतमकी प्रार्थनासे उन मुनिको प्रसन्न करनेके लिये शंकरजी प्रेमपूर्वक ज्योतिर्लिंगस्वरूपसे वहाँ अचल होकर स्थित हो गये। अहो! उन महेश्वरका दर्शन और स्पर्श करनेसे सारी कामनाएँ सिद्ध हो जाती हैं। तत्पश्चात् मुक्ति भी मिल जाती है। शिवजीके अनुग्रहसे शंकरप्रिया परम पावनी गंगा गौतमके स्नेहवश वहाँ गौतमी नामसे प्रवाहित हुईं। उनमें नवाँ अवतार वैद्यनाथ नामसे प्रसिद्ध है। इस अवतारमें बहुत-सी विचित्र लीलाएँ करनेवाले भगवान् शंकर रावणके लिये आविर्भूत हुए थे। उस समय रावणद्वारा अपने लाये जानेको ही कारण मानकर महेश्वर ज्योतिर्लिंगस्वरूपसे चिताभूमिमें प्रतिष्ठित हो गये। उस समयसे वे त्रिलोकीमें वैद्यनाथेश्वर नामसे विख्यात हुए। वे भक्तिपूर्वक दर्शन और पूजन करनेवालेको भोग-मोक्षके प्रदाता हैं। मुने! जो लोग इन वैद्यनाथेश्वर शिवके माहात्म्यको पढ़ते अथवा सुनते हैं, उन्हें यह भुक्ति-मुक्तिका भागी बना देता है। दसवाँ नागेश्वरावतार कहलाता है। यह अपने भक्तोंकी रक्षाके लिये प्रादुर्भूत हुआ था। यह सदा दुष्टोंको दण्ड देता रहता है। इस अवतारमें शिवजीने दारुक नामक राक्षसको, जो धर्मघाती था, मारकर वैश्योंके स्वामी अपने सुप्रिय नामक भक्तकी रक्षा की थी। तत्पश्चात् बहुत-सी लीलाएँ करनेवाले वे परात्पर प्रभु शम्भु लोकोंका उपकार करनेके लिये अम्बिकासहित ज्योतिर्लिंगस्वरूपसे स्थित हो गये। मुने! नागेश्वर नामक उस शिवलिंगका दर्शन तथा अर्चन करनेसे राशि-के-राशि महान् पातक तुरंत विनष्ट हो जाते हैं। मुने! शिवजीका ग्यारहवाँ अवतार रामेश्वरावतार कहलाता है। वह श्रीरामचन्द्रका प्रिय करनेवाला है। उसे श्रीरामने ही स्थापित किया था। जिन भक्तवत्सल शंकरने परम प्रसन्न होकर श्रीरामको प्रेमपूर्वक विजयका वरदान दिया, वे ही लिंगरूपमें आविर्भूत हुए। मुने! तब श्रीरामके अत्यन्त प्रार्थना करनेपर वे सेतुबन्धपर ज्योतिर्लिंगरूपसे स्थित हो गये! उस समय श्रीरामने उनकी भलीभाँति सेवा-पूजा की। रामेश्वरकी अद्भुत महिमाकी भूतलपर किसीसे तुलना नहीं की जा सकती। यह सर्वदा भुक्ति-मुक्तिकी प्रदायिनी तथा भक्तोंकी कामना पूर्ण करनेवाली है। जो मनुष्य सद्भक्तिपूर्वक रामेश्वरलिंगको गंगाजलसे स्नान करायेगा, वह जीवन्मुक्त ही है। वह इस लोकमें जो देवताओंके लिये भी दुर्लभ हैं, ऐसे सम्पूर्ण भोगोंको भोगनेके पश्चात् परम ज्ञानको प्राप्त होगा। फिर उसे कैवल्य मोक्ष मिल जायगा। घुश्मेश्वरावतार शंकरजीका बारहवाँ अवतार है। वह नाना प्रकारकी लीलाओंका कर्ता, भक्तवत्सल तथा घुश्माको आनन्द देनेवाला है। मुने! घुश्माका प्रिय करनेके लिये भगवान् शंकर दक्षिणदिशामें स्थित