भारतकोश
शिव पुराण

शिव पुराण

Shiva Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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पृष्ठ 611
  • उमासंहिता * ५९७

एकमात्र भगवान् शिवका स्मरण ही सर्वोत्तम प्रायश्चित्त है। प्रातःकाल, सायंकाल, रातमें तथा मध्याह्न आदिमें भगवान् शिवका स्मरण करनेसे पापरहित हुआ मनुष्य माहेश्वर धामको प्राप्त कर लेता है। भगवान् शिवके स्मरणसे समस्त पापों और क्लेशोंका क्षय हो जानेसे मनुष्य स्वर्ग अथवा मोक्ष प्राप्त कर लेता है। जिसका चित्त जप, होम और पूजा आदि करते समय निरन्तर भगवान् महेश्वरमें ही लगा रहता हो उसके लिये इन्द्र आदि पदकी प्राप्तिरूप फल तो अन्तराय (विघ्न) ही है। मुने! जो पुरुष भक्तिभावसे दिन-रात भगवान् शिवका स्मरण करता है, उसके सारे पातक नष्ट हो जाते हैं। इसलिये वह कभी नरकमें नहीं पड़ता। नरक और स्वर्ग—ये पाप और पुण्यके ही दूसरे नाम हैं। इनमेंसे एक तो दुःख देनेवाला है और दूसरा सुख देनेवाला। जब एक ही वस्तु कभी प्रीति प्रदान करनेवाली होती है और कभी दुःख देनेवाली बन जाती है, तब यह निश्चय होता है कि कोई भी पदार्थ न तो दुःखमय है और न सुखमय ही है। ये सुख-दुःख तो मनके ही विकार हैं। ज्ञान ही परब्रह्म है और ज्ञान ही तात्त्विक बोधका कारण है। यह सारा चराचर विश्व ज्ञानमय ही है। उस परम विज्ञानसे भिन्न दूसरी कोई वस्तु नहीं है।
(अध्याय १३—१६)



### मृत्युकाल निकट आनेके कौन-कौनसे लक्षण हैं, इसका वर्णन

इसके पश्चात् द्वीपों, लोकों और मनुओंका परिचय देकर संग्रामके फल, शरीर एवं स्त्री-स्वभाव आदिका वर्णन किया गया। तदनन्तर कालके विषयमें व्यासजीके पूछनेपर सनत्कुमारजीने कहा—मुनिश्रेष्ठ! पूर्वकालमें पार्वतीजीने नाना प्रकारकी दिव्य कथाएँ सुनकर परमेश्वर शिवको प्रणाम करके उनसे यही बात पूछी थी।

पार्वती बोलीं—भगवान्! मैंने आपकी कृपासे सम्पूर्ण मत जान लिया। देव! जिन मन्त्रोंद्वारा जिस विधिसे जिस प्रकार आपकी पूजा होती है, वह भी मुझे ज्ञात हो गया। किंतु प्रभो! अब भी एक संशय रह गया है। वह संशय है कालचक्रके सम्बन्धमें। देव! मृत्युका क्या चिह्न है? आयुका क्या प्रमाण है? नाथ! यदि मैं आपकी प्रिया हूँ तो मुझे ये सब बातें बताइये।

महादेवजीने कहा—प्रिये! यदि अकस्मात् शरीर सब ओरसे सफेद या पीला