भारतकोश
शिव पुराण

शिव पुराण

Shiva Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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* संक्षिप्त शिवपुराण *

स्खलन) ही आपका रूप है। आप सूर्य और अरुणके समान तेजस्वी हैं। पारिजातकी मालासे सुशोभित, मुकुट आदि धारण करनेवाले आप स्कन्दस्वामीको सदा नमस्कार है। आप शिवके शिष्य और पुत्र हैं, शिव (कल्याण) देनेवाले हैं, शिवको प्रिय हैं तथा शिवा और शिवके लिये आनन्दकी निधि हैं। आपको नमस्कार है। आप गंगाजीके बालक, कृत्तिकाओंके कुमार, भगवती उमाके पुत्र तथा सरकंडोंके वनमें शयन करनेवाले हैं। आप महाबुद्धिमान् देवताको नमस्कार है। षडक्षरमन्त्र आपका शरीर है। आप छह प्रकारके अर्थका विधान करनेवाले हैं। आपका रूप छह मार्गोंसे परे है। आप षडाननको बारंबार नमस्कार है। द्वादशात्मन्! आपके बारह विशाल नेत्र और बारह उठी हुई भुजाएँ हैं। उन भुजाओंमें आप बारह आयुध धारण करते हैं। आपको नमस्कार है। आप चतुर्भुजरूपधारी, शान्त तथा चारों भुजाओंमें क्रमशः शक्ति, कुक्कुट, वर और अभय धारण करते हैं। आप असुरविदारण देवको नमस्कार है। आपका वक्षःस्थल गजावल्लीके कुचोंमें लगे हुए कुंकुमसे अंकित है। अपने छोटे भाई गणेशजीकी आनन्दमयी महिमा सुनकर आप मन-ही-मन आनन्दित होते हैं। आपको नमस्कार है। ब्रह्मा आदि देवता, मुनि और किंनरगणोंसे गायी जानेवाली गाथाविशेषके द्वारा जिनके पवित्र कीर्तिधामका चिन्तन किया जाता है, उन आप स्कन्दको नमस्कार है। देवताओंके निर्मल किरीटको विभूषित करनेवाली पुष्प-मालाओंसे आपके मनोहर चरणारविन्दोंकी पूजा की जाती है। आपको नमस्कार है। जो वामदेवद्वारा वर्णित इस दिव्य स्कन्दस्तोत्रका पाठ या श्रवण करता है, वह परमगतिको प्राप्त होता है। यह स्तोत्र बुद्धिको बढ़ानेवाला, शिवभक्तिकी वृद्धि करनेवाला, आयु, आरोग्य तथा धनकी प्राप्ति करानेवाला और सदा सम्पूर्ण अभीष्टको देनेवाला है।*

वामदेवने इस प्रकार देवसेनापति भगवान् स्कन्दकी स्तुति करके तीन बार


* वामदेव उवाच—
ॐ नमः प्रणवार्थाय प्रणवार्थविधायिने। प्रणवाक्षरबीजाय प्रणवाय नमो नमः॥
वेदान्तार्थस्वरूपाय वेदान्तार्थविधायिने। वेदान्तार्थविदे नित्यं विदिताय नमो नमः॥
नमो गुहाय भूतानां गुहासु निहिताय च। गुह्याय गुह्यरूपाय गुह्यागमविदे नमः॥
अणोरणीयसे तुभ्यं महतोऽपि महीयसे। नमः परावरज्ञाय परमात्मस्वरूपिणे॥
स्कन्दाय स्कन्दरूपाय मिहिरारुणतेजसे। नमो मन्दारमालोद्यन्मुकुटादिभृते सदा॥
शिवशिष्याय पुत्राय शिवस्य शिवदायिने। शिवप्रियाय शिवयोरानन्दनिधये नमः॥
गाङ्गेयाय नमस्तुभ्यं कार्तिकेयाय धीमते। उमापुत्राय महते शरकाननशायिने॥
षडक्षरशरीराय षड्विधार्थविधायिने। षडध्वातीतरूपाय षण्मुखाय नमो नमः॥
द्वादशायतनेत्राय द्वादशोद्यतबाहवे। द्वादशायुधधराय द्वादशात्मन् नमोऽस्तु ते॥
चतुर्भुजाय शान्ताय शक्तिकुक्कुटधारिणे। वरदाभयहस्ताय नमोऽसुरविदारिणे॥
गजावल्लीकुचालिप्तकुङ्कुमाङ्कितवक्षसे। नमो गजाननानन्दमहिमानन्दितात्मने॥