शिव पुराण
Shiva Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें* वायवीयसंहिता * ६८५
सम्पूर्ण देवताओंके स्वामी शंकर! आपकी जय हो। प्रकृतिरूपिणी कल्याणमयी उमे! आपकी जय हो। प्रकृतिकी नायिके! आपकी जय हो। प्रकृतिसे दूर रहनेवाली देवि! आपकी जय हो। प्रकृतिसुन्दरि! आपकी जय हो। अमोघ महामाया और सफल मनोरथवाले देव! आपकी जय हो, जय हो। अमोघ महालीला और कभी व्यर्थ न जानेवाले महान् बलसे युक्त परमेश्वर! आपकी जय हो, जय हो। सम्पूर्ण जगत्की माता उमे! आपकी जय हो। विश्व-जगन्मये! आपकी जय हो। विश्वजगद्धात्रि! आपकी जय हो। समस्त संसारकी सखी-सहायिके! आपकी जय हो। प्रभो! आपका ऐश्वर्य तथा धाम दोनों सनातन हैं। आपकी जय हो, जय हो। आपका रूप और अनुचरवर्ग भी आपकी ही भाँति सनातन है। आपकी जय हो, जय हो। अपने तीन रूपोंद्वारा तीनों लोकोंका निर्माण, पालन और संहार करनेवाली देवि! आपकी जय हो, जय हो, जय हो। तीनों लोकों अथवा आत्मा, अन्तरात्मा और परमात्मा—तीनों आत्माओंकी नायिके! आपकी जय हो। प्रभो! जगत्के कारण तत्त्वोंका प्रादुर्भाव और विस्तार आपकी कृपादृष्टिके ही अधीन है, आपकी जय हो। प्रलयकालमें आपकी उपक्षायुक्त कटाक्षपूर्ण दृष्टिसे जो भयानक आग प्रकट होती है, उसके द्वारा सारा भौतिक जगत् भस्म हो जाता है; आपकी जय हो।
देवि! आपके स्वरूपका सम्यक् ज्ञान देवता आदिके लिये भी असम्भव है। आपकी जय हो। आप आत्मतत्त्वके सूक्ष्म ज्ञानसे प्रकाशित होती हैं। आपकी जय हो। ईश्वरि! आपने स्थूल आत्मशक्तिसे चराचर जगत्को व्याप्त कर रखा है। आपकी जय हो, जय हो। प्रभो! विश्वके तत्त्वोंका समुदाय अनेक और एकरूपमें आपके ही आधारपर स्थित है, आपकी जय हो। आपके श्रेष्ठ सेवकोंका समूह बड़े-बड़े असुरोंके मस्तकपर पाँव रखता है। आपकी जय हो। शरणागतोंकी रक्षा करनेमें अतिशय समर्थ परमेश्वरि! आपकी जय हो। संसाररूपी विषवृक्षके उगनेवाले अंकुरोंका उन्मूलन करनेवाली उमे! आपकी जय हो। प्रादेशिक ऐश्वर्य, वीर्य और शौर्यका विस्तार करनेवाले देव! आपकी जय हो। विश्वसे परे विद्यमान देव! आपने अपने वैभवसे दूसरोंके वैभवोंको तिरस्कृत कर दिया है, आपकी जय हो। पंचविध मोक्षरूप पुरुषार्थके प्रयोगद्वारा परमानन्दमय अमृतकी प्राप्ति करानेवाले परमेश्वर! आपकी जय हो। पंचविध पुरुषार्थके विज्ञानरूप अमृतसे परिपूर्ण स्तोत्रस्वरूपिणी परमेश्वरि! आपकी जय हो। अत्यन्त भयानक संसाररूपी महारोगको दूर करनेवाले वैद्यशिरोमणि! आपकी जय हो। अनादि कर्ममल एवं अज्ञानरूपी अन्धकारराशिको दूर करनेवाली चन्द्रिकारूपिणी शिवे! आपकी जय हो। त्रिपुरका विनाश करनेके लिये कालाग्नि-स्वरूप महादेव! आपकी जय हो। त्रिपुरभैरवि! आपकी जय हो। तीनों गुणोंसे मुक्त महेश्वर! आपकी जय हो। तीनों गुणोंका मर्दन करनेवाली महेश्वरि! आपकी जय हो। आदिसर्वज्ञ! आपकी जय हो। सबको ज्ञान देनेवाली देवि! आपकी जय हो। प्रचुर दिव्य अंगोंसे सुशोभित देव!