शिव पुराण
Shiva Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें- वायवीयसंहिता * ८११
निवेदनीय है। गुड़ और घीसे युक्त महाचरुका भी भोग लगाना चाहिये। पाटल, उत्पल और कमल आदिसे सुवासित जल पीनेके लिये देना चाहिये। पाँच प्रकारकी सुगन्धोंसे युक्त तथा अच्छी तरह लगाया हुआ ताम्बूल मुखशुद्धिके लिये अर्पित करना चाहिये। सुवर्ण और रत्नोंके बने हुए आभूषण, नाना प्रकारके रंगवाले नूतन महीन वस्त्र, जो दर्शनीय हों, इष्टदेवको देने चाहिये। उस समय गीत, वाद्य और कीर्तन आदि भी करने चाहिये।
मूलमन्त्रका एक लाख जप करना चाहिये। पूजा कम-से-कम एक बार, नहीं तो दो या तीन बार करनी चाहिये; क्योंकि अधिकका अधिक फल होता है। होम-सामग्रीके लिये जितने द्रव्य हों, उनमेंसे प्रत्येक द्रव्यकी कम-से-कम दस और अधिक-से-अधिक सौ आहुतियाँ देनी चाहिये। मारण और उच्चाटन आदिमें शिवके घोररूपका चिन्तन करना चाहिये। शान्तिकर्म या पौष्टिककर्म करते समय शिवलिंगमें, शिवाग्निमें तथा अन्य प्रतिमाओंमें शिवके सौम्यरूपका ध्यान करना चाहिये। मारण आदि कर्मोंमें लोहेके बने हुए स्रुक् और स्रुवाका उपयोग करना चाहिये। अन्य शान्ति आदि कर्मोंमें स्रुक् और स्रुवा बनवाने चाहिये। मृत्युपर विजय पानेके लिये घी, दूधमें मिलायी हुई दूर्वासे, मधुसे, घृतयुक्त चरुसे अथवा केवल दूधसे भी हवन करना चाहिये तथा रोगोंकी शान्तिके लिये तिलोंकी आहुति देनी चाहिये। समृद्धिकी इच्छा रखनेवाला पुरुष महान् दारिद्र्यकी शान्तिके लिये घी, दूध अथवा केवल कमलके फूलोंसे होम करे। वशीकरणका इच्छुक पुरुष घृतयुक्त जातीपुष्प (चमेली या मालतीके फूल)-से हवन करे। द्विजको चाहिये कि वह घृत और करवीर-पुष्पोंसे आहुति देकर आकर्षणका प्रयोग सफल करे। तेलकी आहुतिसे उच्चाटन और मधुकी आहुतिसे स्तम्भन कर्म करे। सरसोंकी आहुतिसे भी स्तम्भन किया जाता है। बड़के बीज और तिलकी आहुतिद्वारा मारण और उच्चाटन करे। नारियलके तेलकी आहुति देकर विद्वेषण कर्म करे। रोहीके बीजकी आहुति देकर बन्धनका तथा लाल सरसों मिले हुए सम्पूर्ण होम-द्रव्योंसे सेना-स्तम्भनका प्रयोग करे।
अभिचार-कर्ममें हस्तचालित यन्त्रसे तैयार किये गये तेलकी आहुति देनी चाहिये। कुटकीकी भूसी, कपासकी ढोढ़ तथा तैलमिश्रित सरसोंकी भी आहुति दी जा सकती है। दूधकी आहुति ज्वरकी शान्ति करनेवाली तथा सौभाग्यरूप फल प्रदान करनेवाली होती है। मधु, घी, और दहीको परस्पर मिलाकर इनसे, दूध और चावलसे अथवा केवल दूधसे किया गया होम सम्पूर्ण सिद्धियोंको देनेवाला होता है। सात समिधा आदिसे शान्तिक अथवा पौष्टिक कर्म भी करे। विशेषतः द्रव्योंद्वारा होम करनेपर वश्य और आकर्षणकी सिद्धि होती है। बिल्वपत्रोंका हवन वशीकरण तथा आकर्षणका साधक और लक्ष्मीकी प्राप्ति करानेवाला है, साथ ही वह शत्रुपर विजय प्रदान कराता है। शान्तिकार्यमें पलाश और खैर आदिकी समिधाओंका होम करना चाहिये। क्रूरतापूर्ण कर्ममें कनेर और आककी समिधाएँ होनी चाहिये। लड़ाई-झगड़ेमें कटीले पेड़ोंकी समिधाओंका हवन करना