शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)
Shiva Samhita with Hindi Commentary
भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १२० ) शिवसंहिता भाषाटीकासमेता । योगीको उचित है कि, यह दोनों अमरोली और सहजो- लीका यत्नपूर्वक सर्वदा साधन करे ॥ ९८ ॥ मूलम्-अयं योगो मया प्रोक्तो भक्तानां स्नेहतः प्रिये ॥ गोपनीयः प्रयत्नेन न देयो यस्य कस्यचित् ॥ ९९ ॥ टीका-हेप्रिये पार्वती ! हम भक्तोंपर प्रेम करके यह योग जो कहा है यत्नपूर्वक गोपनीय है सामान्य मनुष्य- को कदापि देना उचित नहीं है ॥ ९९ ॥ मूलम्--एतद्गुह्यतमं गुह्यं न भूतं न भविष्य ति ॥ तस्मादेतत्प्रयत्नेन गोपनीयं सदा बुधैः ॥ १०० ॥ टीका-इस वज्रोलीमुद्रासे अधिक गोपनीय न कुछ भया है न होगा. इसकारणसे बुद्धिमान साधकको यत्नपूर्वक इसको गोप्य रखना उचित है ॥ १०० ॥ मूलम्-स्वमूत्रोत्सर्गकाले यो बलादाकृ- ष्य वायुना ॥ स्तोकं स्तोकं त्यजेन्मूत्रमू- र्ध्वमाकृष्य तत्पुनः ॥१०१॥ गुरूपदिष्टमा- र्गेण प्रत्यहं यः समाचरेत् ॥ बिन्दुसिद्धि- र्भवेत्तस्य महासिद्धिप्रदायिका ॥ १०२ ॥