शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)
Shiva Samhita with Hindi Commentary
भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १३२) शिवसंहिता भाषाटीकासमेता । संवत्सरैः सिद्धिरेतस्य नात्र संशयः ॥ सर्वयोगाधिकारी स नात्र कार्या विचा- रणा ॥ २९ ॥ टीका-महावीर्यवान् उत्साहयुक्त स्वरूपवान् शूर- तासम्पन्न शास्त्रज्ञ अभ्यासशील अर्थात् श्रुतिधर मो- हसे हीन आकुलतारहित अर्थात् सावधान नवीन यौवनसम्पन्न अर्थात् तरुण प्रमाणभोजी जितेन्द्रिय निर्भय पवित्राचार सर्वकर्ममें निपुण दानशील शरणागतपालक स्थिरचित्त बुद्धिमान् सन्तोषयुक्त क्षमावान् शीलवान् धार्मिक कर्मोंको गोप्य रखनेवाला प्रियसत्यवादी शास्त्रमें विश्वास देवता और गुरुपूजक जनसङ्गरहित महाव्याधिरहित ऐसे गुण जिसमें हो वह अधिमात्रतम है और सर्व योगका साधक है इसको तीनवर्षमें सिद्धि प्राप्त होगी इसमें संशय नहीं है. यह सर्वयोगका अधिकारी है ऐसे पुरुषको गुरु समस्त योगका उपदेश करदें इसमें विचारका कुछ प्रयोजन नहीं है ॥ २५ ॥ २६ ॥ २७ ॥ २८ ॥ २९ ॥ अथ प्रतीकोपासनम् । मूलम्-प्रतीकोपासना कार्या दृष्टादृष्टफल- प्रदा ॥ पुनाति दर्शनादत्र नात्र कार्या विचारणा ॥ ३० ॥