भारतकोश
शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

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पंचमपटलः। ( १०३ ) टीका-अब प्रतीकउपासना कहतेहैं प्रतीकउपास- नासे दृष्टादृष्टफल लाभ होताहै और उसके दर्शनसे मनुष्य पवित्र होताहै इसमें संशय नहीं है ॥ ३० ॥ मूलम्-गाढातपे स्वप्रतिबिम्बितेश्वरं निरी- क्ष्य विस्फारितलोचनद्वयम् ॥ यदा नभः पश्यति स्वप्रतीकं नभोऽङ्गणे तत्क्षणमेव पश्यति ॥ ३१ ॥ टीका-गाढआतपमें अर्थात् गहरेधूपमें स्वईश्वरका प्रतिबिम्ब नेत्रास्थिरकरके देखे जब अपने छायाका प्रतिबिम्ब शून्यमें देखपडे तब ऊपर आकाशमें अपना प्रतिबिम्ब अवश्य देखेगा ॥ ३१ ॥ मूलम्-प्रत्यहं पश्यते यो वै स्वप्रतीकं नभो- ऽङ्गणे॥ आयुर्वृद्धिर्भवेत्तस्य न मृत्युः स्या- त्कदाचन ॥ ३२ ॥ टीका-जो नित्य आकाशमें स्वप्रतीक अर्थात् अपना प्रतिबिम्ब देखेगा उसके आयुकी वृद्धि होगी और उसकी मृत्यु कभी न होगी अर्थात् चिरंजीवी हो जायगा ॥ ३२ ॥ मूलम्-यदापश्यतिसम्पूर्णंस्वप्रतीकंनभो-