शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)
Shiva Samhita with Hindi Commentary
भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपंचमपटलः । (१३७) टीका-जो इसका अभ्यास करेगा उसको क्रमसे नाद उत्पन्न होगा. हेदेवि ! यह प्रतीकोपासना निर्वाण योगका दाता है इसहेतुसे हमको अतिप्रिय है यह शीघ्र फलदाता है इसको यत्नसे गोप्य रखना उचि- त है ॥ ४२ ॥ मूलम्--मत्तभृङ्गवेणुवीणासदृशः प्रथमोध्व- निः ॥ ४३ ॥ एवमभ्यासतः पश्चात् संसा- रध्वान्तनाशनम् ॥ घण्टानादसमः पश्चात् ध्वनिर्मेघरवोपमः ॥ ४४ ॥ ध्वनौ तस्मि- न्मनो दत्त्वा यदा तिष्ठति निर्भरः ॥ तदा संजायते तस्य लयस्य मम वल्लभे ॥ ४५॥ टीका-योगअभ्यासद्वारा प्रथम मत्त भ्रमरकी नाई शब्द और वेणु और वीणाके समान शब्द उत्पन्न होगा इसी तरह संसारतम नाशक योगअभ्याससे फिर घंटानाद समान शब्द होगा. फिर मेघ गर्जनके समान ध्वनि होगी. हे प्रिये पार्वती ! उस ध्वनिमें यदि मन निश्चल स्थित हो जाय तब मोक्षका दाता लय उत्पन्न होगा ॥ ४३ ॥ ४४ ॥ ४५ ॥ मूलम्--तत्र नादे यदा चित्तं रमते योगिनो भृशम् ॥ विस्मृत्य सकलं बाह्यं नादेन सह शाम्यति ॥ ४६ ॥