भारतकोश
शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

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( १३८ ) शिवसंहिता भाषाटीकासमेता । टीका-जब योगीका चित्त उस नादमें निरंतर रम- णकरेगा तब सकल विषयसे स्मरणरहित होके चित्त समाधिमें लय होजायगा ॥ ४६ ॥ मूलम्-एतदभ्यासयोगेन जित्वा सम्य- ग्गुणान्बहून् ॥सर्वारम्भपरित्यागी चिदा- काशे विलीयते ॥ ४७ ॥ टीका-इसीप्रकार योगअभ्यासद्वारा सर्व गुणोंको जीतके और सब कार्योंके आरंभको त्यागके योगी आनंदपूर्वक चैतन्यस्वरूप हृदयाकाशमें लय होजायगा ॥ ४७ ॥ मूलम्-नासनं सिद्धसदृशं न कुम्भसदृशं बलम् ॥ न खेचरीसमा मुद्रा न नादसदृ- शो लयः ॥ ४८ ॥ टीका-हेदेवी ! सिद्धासनके समान कोई और आस- न नहीं है और न कुम्भकके समान कोई बल है और न खेचरीके समान कोई मुद्रा है और न नादके समान कोई दूसरा लय है ॥ ४८ ॥ अथ मूलाधारपद्मविवरणम् । मूलम्-इदानीं कथयिष्यामि मुक्तस्यानुभवं