भारतकोश
शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

पृष्ठ 173, कुल 216 में से

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पंचमपटलः । (१६९) तो उसका प्रतिमापूजन करना वा जप करना सर्वथा अनर्थवत् है ॥ १४९ ॥ मूलम्-यक्षराक्षसगन्धर्वा अप्सरोगणकिन्न- राः ॥ सेवन्ते चरणौ तस्य सर्वे तस्य व- शानुगाः ॥ १५० ॥ टीका-यक्ष और राक्षस और गन्धर्व और अप्सरा और किन्नर आदि सब इस ध्यानयुक्त योगीके वशमें होजाते हैं और उसके चरणकी सेवा करते हैं ॥१५०॥ मूलम्-करोति रसनां योगी प्रविष्टां विपरी- तगाम्॥ लम्बिकोर्ध्वेषु गर्तेषु धृत्वा ध्या- नं भयापहम् ॥ १५१ ॥ अस्मिन् स्था- ने मनो यस्य क्षणार्धं वर्ततेऽचलम् ॥ तस्य सर्वाणि पापानि संक्षयं यान्ति तत्क्ष- णात् ॥ १५२ ॥ टीका-जो योगी विपरीतगामी जिह्वाको ऊपर तालूमूलमें प्रवेश करके यह भयनाशक आज्ञाकमल- का ध्यान अर्धक्षणभी मन अचल स्थिरतापूर्वक करते हैं उनका सकल पातक उसीक्षण नाश होजाताहै ॥ १५१ ॥ १५२ ॥ मूलम्-यानि यानि हि प्रोक्तानि पंचपद्मे फ-

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