भारतकोश
शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

पृष्ठ 180, कुल 216 में से

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( १७६ ) शिवसंहिता भाषाटीकासमेता । टीका- गंगा यमुनाके मध्यमें सरस्वतीका प्रवाह है यह त्रिवेणीसंगममें स्नान करनेसे मनुष्य परमगतिको प्राप्त होता है ॥ १७३ ॥ मूलम्-इडा गंगा पुरा प्रोक्ता पिंगला चार्कपु- त्रिका ॥ मध्या सरस्वती प्रोक्ता तासां संगोऽतिदुर्लभः ॥ १७४ ॥ टीका-इडा गंगा है और पिंगला यमुना है और मध्यमें सुषुम्णा सरस्वती है यह त्रिवेणी संगम कहा गया है इसका स्नान अतिदुर्लभ है ॥ १७४ ॥ मूलम्-सितासिते संगमे यो मनसा स्ना- नमाचरेत् ॥ सर्वपापविनिर्मुक्तो याति ब्रह्मसनातनम् ॥ १७५ ॥ टीका-यह इडा और पिंगलाके संगममें मानसिक स्नान करनेसे साधक सर्व पापसे मुक्त होके सनातन ब्रह्ममें लय होजाताहै ॥ १७५ ॥ मूलम्-त्रिवेण्यां संगमे यो वै पितृकर्म स- माचरेत् ॥ तारयित्वा पितृन्सर्वान्स याति परमां गतिम् ॥ १७६ ॥ टीका-जो पुरुष इस त्रिवेणीसंगममें पितृकर्मका

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