भारतकोश
शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

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पंचमपटल. । ( १७५ ) प्रवाह सदैव सुषुम्णामें होजायगा ॥ १६९ ॥ मूलम्-मूलपद्मस्थिता योनिर्वामदक्षिण- कोणतः॥इडा पिंगलयोर्मध्ये सुषुम्णा यो- निमध्यगा ॥ १७० ॥ ब्रह्मरन्ध्रन्तु तत्रैव सुषुम्णाधारमण्डले ॥ यो जानाति स मुक्तः स्यात्कर्मबन्धाद्विचक्षणः ॥१७१॥ टीका-मूलाधारपद्मस्थित जो योनि है उस योनिके वाम दक्षिण भागमें इडा और पिंगला नाडी स्थित हैं और दोनों नाडीके बीचमें अर्थात् योनिके मध्यमें सुषुम्णाकी स्थिति है उसी सुषुम्णाके आधारमंडलमें अर्थात् उसके मध्यमें ब्रह्मरन्ध्र है जो इसको जानता है सो बुद्धिमान् कर्मबन्धसे मुक्त है ॥ १७० ॥ १७१ ॥ मूलम्-ब्रह्मरन्ध्रमुखे तासां संगमः स्याद- संशयः॥ तस्मिन्स्नाने स्नातकानां मुक्तिः स्यादविरोधतः ॥ १७२ ॥ टीका-ब्रह्मरन्ध्रके मुखमें इन तीनों नाडीका नि- श्चय सम्बन्ध है इसमें स्नान करनेसे ज्ञानीलोगोंको मुक्तिलाभ होगी ॥ १७२ ॥ मूलम्-गंगायमुनयोर्मध्ये वहत्येषा सरस्व- ती ॥तासां तु संगमे स्नात्वा धन्यो याति परांगतिम् ॥ १७३ ॥