भारतकोश
शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

पृष्ठ 188, कुल 216 में से

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पृष्ठ 188

( १८४ ) शिवसंहिता भाषाटीकासमेता। मूलम्-चित्तवृत्तिर्यदा लीना कुलाख्ये पर- मेश्वरे॥तदा समाधिसाम्येन योगी निश्च- लतां व्रजेत् ॥१९९ ॥ टीका-जब साधक यह कुलनामक ईश्वरमें चित्त- को लीन करदेगा तब योगीकी समाधि निश्चल सम होजायगी ॥ १९९ ॥ मूलम्-निरन्तरकृते ध्याने जगद्विस्मरणं भवेत् ॥ तदा विचित्रसामर्थ्यं योगिनो भवति ध्रुवम् ॥ २०० ॥ टीका-यह निरन्तर ध्यान करनेसे जगत् विस्मरण होजायगा तब योगीको अवश्य विचित्र सामर्थ्य हो- जायगी ॥ २०० ॥ मूलम्-तस्माद्गलितपीयूषं पिबेद्योगी निर- न्तरम्॥ मृत्योर्मृत्युं विधायाशु कुलं जि- त्वा सरोरुहे ॥ २०१ ॥ अत्र कुण्डलिनी शक्तिर्लयं याति कुलाभिधा ॥ तदा चतु- र्विधा सृष्टिर्लीयते परमात्मनि ॥ २०२ ॥ टीका-सहस्रदलकमलसे जो अमृत स्रवता है उ- सको योगी निरन्तर पान करता है सो योगी अपने मृ- त्युका मृत्युविधानपूर्वक कुलसहित जय करके चिरं-

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