भारतकोश
शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

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(१८८) शिवसंहिता भाषाटीकासमेता। टीका-यह शून्यके ध्यानका विचित्र फल ध्यानसे ही जाना जाता है इसके प्रभावसे साधकको अणिमादि अष्टसिद्धि अवश्य प्राप्त होती है ॥ २११ ॥ मूलम्-राजयोगो मयाख्यातः सर्वतन्त्रेषु गोपितः॥राजाधिराजयोगोऽयं कथया- मि समासतः ॥ २१२ ॥ टीका-हे पार्वती ! यह राजयोग सर्वतन्त्रोंकरके गोपित है सो तुमसे हमने कहा है अब राजाधिराज यो- ग विस्तारसहित कहते हैं श्रवण करो ॥ २१२ ॥ मूलम्-स्वस्तिकञ्चासनं कृत्वा सुमठे जन्तु- वर्जिते ॥ गुरुं संपूज्य यत्नेन ध्यानमेत- त्समाचरेत् ॥ २१३ ॥ टीका-साधक एकांतस्थान जनरहित सुन्दर मठमें यत्नपूर्वक गुरुकी पूजा करके स्वस्तिकासनसे स्थित होके यह ध्यान करे ॥ २१३ ॥ मूलम्-निरालम्बं भवेज्जीवं ज्ञात्वा वेदान्त- युक्तितः॥निरालम्बं मनः कृत्वा न किञ्चि- च्चिन्तयेत्सुधीः ॥ २१४ ॥ टीका-बुद्धिमान् योगी वेदांतयुक्ति अनुसार जीव- को और मनको निरालम्ब करके चिन्तन करे इसके सिवाय और कुछ चिन्तना न करे ॥ २१४ ॥