भारतकोश
शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

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पंचमपटलः। ( १८७ ) निश्चल स्थिर रक्खेगा वही निश्चय यथार्थ भक्त योगी है और वह सर्वलोकमें पूजित होता है और उसके पाप- का समूह उसी क्षण नष्ट होजाता है ॥ २०८ ॥ मूलम्-यं दृष्ट्वा न प्रवर्तन्ते मृत्युसंसारव- र्त्मनि॥अभ्यसेत्तं प्रयत्नेन स्वाधिष्ठानेन वर्त्मना ॥ २०९ ॥ टीका-इसके अवलोकन करनेसे मृत्युरूप जो सं- सारपथ है इसमें भ्रमण करना छूट जायगा अर्थात् जन्ममरणसे रहित होजायगा इसका अभ्यास स्वाधि- ष्ठानमार्गसे यत्न करके करना उचित है ॥ २०९ ॥ मूलम्-एतद्ध्यानस्य माहात्म्यं मया वक्तुं न शक्यते ॥ यः साधयति जानाति सोस्माकमपि सम्मतः ॥ २१० ॥ टीका-हे देवी ! इस शून्यके ध्यानके माहात्म्यको हम नहीं कहसकते अर्थात् बहुत विशेष है जो योगी इसका अभ्यास करते हैं सो जानते हैं और वह हमारे बराबर हैं ॥ २१० ॥ मूलम्-ध्यानादेव विजानाति विचित्रफल- सम्भवम् ॥ अणिमादिगुणोपेतो भवत्ये- व न संशयः ॥ २११ ॥