भारतकोश
शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

पृष्ठ 190, कुल 216 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 190

( १८६ ) शिवसंहिता भाषाटीकासमेता । बाहर पूर्वोक्त स्वप्रतीकका चिन्तन करे उससे चित्तको स्थिर करके महत् शून्यका शुद्धवृत्तिसे चिन्तन करे २०५ मूलम्-आद्यन्तमध्यशून्यं तत्कोटिसूर्यस- मप्रभम् ॥ चन्द्रकोटिप्रतीकाशमभ्यस्य सिद्धिमाप्नुयात् ॥ २०६ ॥ टीका-आदि अंत मध्य शून्य यह सर्वत्र शून्यमें कोटि सूर्यके समान प्रभा और कोटिचन्द्रके समान शीतलप्रकाशके देखनेका अभ्यास करनेसे साधकको परमसिद्धि लाभ होगी ॥ २०६ ॥ मूलम्-एतद्ध्यानं सदा कुर्यादनालस्यं दिने दिने ॥ तस्य स्यात्सकला सिद्धिर्व- त्सरान्नात्र संशयः ॥ २०७ ॥ टीका-जो पुरुष आलस्यको त्यागके सर्वदा प्रति- दिन इस शून्यका ध्यान करेगा उसको निश्चय एकवर्ष में सकल सिद्धि लाभ होगी ॥२०७ ॥ मूलम्-क्षणार्धं निश्चलं तत्र मनो यस्य भ- वेद्ध्रुवम्॥स एव योगी सद्भक्तः सर्वलोकेषु पूजितः ॥ तस्य कल्मषसङ्घातस्तत्क्षणा- देव नश्यति ॥ २०८ ॥ टीका-जो साधक इस शून्यमें अर्धक्षणभी मनको