शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)
Shiva Samhita with Hindi Commentary
भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १९८ ) शिवसंहिता भाषाटीकासमेता । कुण्ड बनायके कनेरपुष्पके साथ गुड और दूध और घृत मिलायके होम करे ॥ २४४ ॥ मूलम्-अनुष्ठाने कृते धीमान्पूर्वसेवा कृता भवेत् ॥ ततो ददाति कामान्वै देवी त्रिपु- रभैरवी ॥ २४५ ॥ टीका-बुद्धिमान् साधक इसीप्रकार अनुष्ठानपूर्वक आराधना करके त्रिपुरभैरवी देवीको सन्तुष्ट करे तो उसको इच्छापूर्वक देवी फल देती है ॥ २४५ ॥ मूलम्-गुरुं सन्तोष्य विधिवल्लब्ध्वा म- न्त्रवरोत्तमम् ॥ अनेन विधिना युक्तो म- न्दभाग्योऽपि सिद्ध्यति ॥ २४६ ॥ टीका-साधक विधिपूर्वक गुरुको संतोप करके यह उत्तम मन्त्र ग्रहण करे इस विधानसंयुक्त ग्रहण कर- नेसे मन्दभाग्य साधकभी सिद्धि लाभ करते हैं ॥२४६॥ मूलम्-लक्षमेकं जपेद्यस्तु साधको विजिते- न्द्रियः ॥ २४७ ॥ दर्शनात्तस्य क्षुभ्यन्ते योषितो मदनातुराः ॥ पतन्ति साधक- स्याग्रे निर्लज्जा भयवर्जिताः॥ २४८ ॥ टीका-योगी इन्द्रियनिग्रहपूर्वक एक लक्ष जप करे तो उसके दर्शनमात्रसे कामातुर स्त्रियें मोहित