शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)
Shiva Samhita with Hindi Commentary
भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपंचमपटलः । ( ३९९ ) होयके साधकके आगे निर्लज्ज और भयरहित होके गिरती हैं ॥ २४७ ॥ २४८ ॥ मूलम्-जप्तेन च द्विलक्षेण ये यस्मिन्विषये स्थिताः॥आगच्छन्ति यथातीर्थं विमुक्त- कुलविग्रहाः ॥ ददति तस्य सर्वस्वं तस्यै- व च वशे स्थिताः ॥ २४९ ॥ टीका-यह मन्त्र दो लक्ष जप करनेसे कामिनी स्त्रियें साधकके समीप इसप्रकार आतीहैं कि, जैसे कुलीना तीर्थोंमें भय लज्जा रहित होके जाती हैं और साधकके वशमें होके अपना सर्वस्व उसको देती हैं ॥ २४९ ॥ मूलम्-त्रिभिर्लक्षैस्तथाजप्तैर्मण्डलीका स- मण्डलाः ॥ २५० ॥ वशमायान्ति ते सर्वे नात्र कार्या विचारणा॥ षड्भिर्लक्षैर्महीपालं सभृत्यबलवाहनम् ॥ २५१ ॥ टीका-तीन लक्ष जप करनेसे मंडलसहित मंडल- पती राजा साधकके वशमें होजाँयगे इसमें संशय नहीं है और छः लक्ष जप करनेसे बल वाहन संयुक्त राजा साधकके वश होजायगा ॥ २५० ॥ २५१ ॥ मूलम्-लक्षैर्द्वादशभिर्जप्तैर्यक्षरक्षोरगेश्व-