शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)
Shiva Samhita with Hindi Commentary
भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २०० ) शिवसंहिता भाषाटीकासमेता । राः॥वशमायान्ति ते सर्व आज्ञां कुर्वन्ति नित्यशः ॥ २५२ ॥ टीका-यह मन्त्र बारह लक्ष जप करनेसे यक्ष और राक्षस और पन्नग यह सब वशमें होके साधककी नि- त्य आज्ञा पालन करतेहैं ॥ २५२ ॥ मूलम्-त्रिपञ्चलक्षजपैस्तु साधकेन्द्रस्य धीमतः॥सिद्धविद्याधराश्चैव गन्धर्वाप्सर- सांगणाः ॥ २५३ ॥ वशमायान्ति ते सर्वे नात्र कार्या विचारणा ॥ हठाच्छ्रवणवि- ज्ञानं सर्वज्ञत्वं प्रजायते ॥ २५४ ॥ टीका-पन्द्रहलक्ष जप करनेसे सिद्ध और विद्याधर और गंधर्व और अप्सरा यह सब बुद्धिमान् साधकके वशमें होजातेहैं इसमें संदेह नहीं है और साधकको हठसे विशेष श्रवणशक्ति होगी और सर्ववस्तुका ज्ञान उत्पन्न होगा ॥ २५३ ॥ २५४ ॥ मूलम्-तथाष्टादशभिर्लक्षैर्देहेनानेन साध- कः ॥ उत्तिष्ठेन्मेदिनीं त्यक्त्वा दिव्यदेह- स्तु जायते ॥ भ्रमते स्वेच्छया लोके छि- द्रां पश्यति मेदिनीम् ॥ २५५ ॥ टीका-जो साधक अठारह लक्ष जप करेगा वह भू-