शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)
Shiva Samhita with Hindi Commentary
भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपंचमपटलः । ( २०३ ) मूलम्-य इदं पठते नित्यमाद्योपान्तं विच- क्षणः ॥ योगसिद्धिर्भवेत्तस्य क्रमेणैव न संशयः ॥ स मोक्षं लभते धीमान्य इदं नित्यमर्चयेत् ॥ २६३ ॥ टीका-जो विद्वान् यह शिवसंहिताका नित्य आ द्योपान्त पाठ करेगा उसको क्रमसे अवश्य योगसिद्धि होगी और जो बुद्धिमान् इस ग्रन्थका नित्य पूजन क- रेगा उसको मुक्ति लाभ होगी ॥ २६३ ॥ मूलम्-मोक्षार्थिभ्यश्च सर्वेभ्यः साधुभ्यः श्रावयेदपि॥२६४॥क्रियायुक्तस्य सिद्धिः स्यादक्रियस्य कथम्भवेत् ॥ तस्मात्क्रिया विधानेन कर्तव्या योगिपुंगवैः ॥ २६५॥ यदच्छालाभसन्तुष्टः सन्त्यक्तान्तरसंग- कः॥ गृहस्थश्चाप्यनासक्तः स मुक्तो यो- गसाधनात् ॥ २६६ ॥ , टीका-मोक्षार्थी और सर्व साधु मनुष्य उनको यह शिवसंहिताग्रंथ सुनाना. जो क्रियासे युक्त होगा उसको सिद्धि प्राप्त होगी क्रियाहीन मनुष्यको क्या होसक्ता है अर्थात् सिद्धि लाभ.नहीं होसकती विधानपूर्वक क्रियाका अनुष्ठान करे तो इच्छापूर्वक लाभसे सन्तुष्ट होगा और