शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)
Shiva Samhita with Hindi Commentary
भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २०४ ) शिवसंहिता भाषाटीकासमेता । जो गृहस्थ होगा और इन्द्रियोंमें आसक्त न होगा सो मनु- ष्य योगसाधनसे मुक्तहोगा ॥ २६४॥ २६५ ॥ २६६ ॥ मूलम्-गृहस्थानां भवेत्सिद्धिरीश्वराणां जपेन वै ॥ योगक्रियाभियुक्तानां तस्मा- त्संयतते गृही ॥ २६७ ॥ टीका-योगक्रियावान् गृहस्थ लोगोंको जप करनेसे सिद्धि प्राप्तहोगी इस हेतुसे योगसाधनमें गृहस्थ मनु- ष्यको यत्न करना उचित है ॥ २६७ ॥ मूलम्-गेहे स्थित्वा पुत्रदारादिपूर्णः सङ्गं त्यक्त्वा चान्तरे योगमार्गे॥ सिद्धेश्चिह्नं वी- क्ष्य पश्चाद् गृहस्थः क्रीडेत्सो वै संमतं साधयित्वा ॥ २६८ ॥ टीका-जो गृहस्थ गृहमें रहके स्त्रीपुत्रादिसे पूर्ण होके अंतरीय सबसे त्यागपूर्वक योगसाधनसे प्रवृत्त होय सो सिद्धिचिह्न अवलोकनपूर्वक साधना करके सर्वदा आनन्दमें क्रीडा करेगा ॥ २६८ ॥ इति श्रीशिवसंहितायां हरगौरीसंवादे योगशास्त्रे पंचमः पटलः समाप्तः ॥ ५ ॥ शुभम् ॥ समाप्तोऽयं ग्रन्थः । पुस्तक मिलनेका ठिकाना- खेमराज, श्रीकृष्णदास, "श्रीवेङ्कटेश्वर" छापाखाना, खेतवाड़ी-बंबई.