भारतकोश
शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

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प्रथमपटलः । (२१) उसमें कालका नियम है इस हेतुसे आत्मा सर्वथा निश्चय परिपूर्ण है ॥ ५८ ॥ मूलम्-यस्मान्न विद्यते नाशः पंचभूतैर्वृथा- त्मकैः॥ तस्मादात्मा भवेन्नित्यस्तन्नाशो न भवेत्खलु ॥ ५९॥ टीका-यह जो मिथ्या पंचभूत हैं इनसे उसका नाश नहीं है इस कारणसे आत्मा नित्य है और यह निश्चय है कि उसका कभी नाश नहीं होता ॥ ५९ ॥ मूलम्-यस्मात्तदन्यो नास्तीह तस्मादेकोऽ- स्ति सर्वदा॥यस्मात्तदन्यो मिथ्या स्या- दात्मा सत्यो भवेत्खलु ॥६० ॥ टीका-जब दूसरा कुछ नहीं है तो एक वही सर्वदा अद्वैत है जब उसके सिवाय अर्थात् उससे अन्य सब मिथ्या है तो वही एक शुद्ध आत्मा सत्य है ॥ ६० ॥ मूलम्-अविद्याभूते संसारे दुःखनाशे सुखं यतः ॥ ज्ञानादाद्यंतशून्यं स्यात्तस्मा- दात्मा भवेत्सुखम् ॥ ६१ ॥ टीका-यह संसार अविद्यासे उत्पन्न भया है इस- में दुःखका नाश होनेपर सुख होता है और ज्ञानसे