शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)
Shiva Samhita with Hindi Commentary
भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २२ ) शिवसंहिता भाषाटीकासमेता । दुःखका आदि अंत शून्य है इस हेतुसे निश्चय आत्मा सुखस्वरूप है ॥ ६१ ॥ मूलम्-यस्मान्नाशितमज्ञानं ज्ञानेन विश्व- कारणम् ॥ तस्मादात्मा भवेज्ज्ञानं ज्ञानं तस्मात्सनातनम् ॥ ६२ ॥ टीका-जिसकरके अज्ञान नाश होताहै और यह जान पडताहै कि अज्ञानही संसारका कारण है सोई आत्मज्ञान है और ज्ञानही नित्य है ॥ ६२ ॥ मूलम्-कालतो विविधं विश्वं यदा चैव भवे- दिदम् ॥ तदेकोऽस्ति स एवात्मा कल्प- नापथवर्जितः ॥ ६३ ॥ टीका-काल पायके अनेक प्रकारका संसार उत्पन्न होताहै, सो वह एक आत्मा है वह कल्पनापथवर्जित है अर्थात् कल्पना नहीं होसक्ती ॥ ६३ ॥ मूलम्-बाह्यानि सर्वभूतानि विनाशं यान्ति कालतः ॥ यतो वाचो निवर्त्तन्ते आत्मा द्वैतविवर्जितः ॥ ६४ ॥ टीका-आत्मासे जो अतिरिक्त वस्तु उत्पन्न है वह काल पायके नाश होजाती हैं आत्मा द्वैतरहित ॰ है,