भारतकोश
शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

पृष्ठ 28, कुल 216 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 28

( २४ ) शिवसंहिता भाषाटीकासमेता । संकल्पसे रहित होके योगी आत्मासे आत्माको आत्मामें देखता है ॥ ६६ ॥ मूलम्-आत्मनात्मनि चात्मानं दृष्ट्वानन्तं सुखात्मकम्॥ विस्मृत्य विश्वं रमते समा- धेस्तीव्रतस्तथा ॥ ६७ ॥ टीका-संसार विस्मृति करके अर्थात् भुलाके आत्मासे आत्माको आत्मारूप होके देखता और आत्माके आनन्द सुखरूपी तीव्रसमाधिमें योगी रम- ण करता है ॥ ६७ ॥ मूलम्-मायैव विश्वजननी नान्या तत्त्वधिया परा ॥ यदा नाशं समायाति विश्वं नास्ति तदा खलु ॥ ६८ ॥ टीका-माया संसारकी माता है अर्थात् मायासेही संसार उत्पन्न भयाहै यह निश्चय है कि दूसरा हेतु इस जगत्के उत्पत्तिका नहीं है ज्ञान करके इस मायाके नाश होनेसे संसारका अभाव निश्चय जानपडताहै॥६८॥ मूलम्-हेयं सर्वमिदं यस्य मायाविलसितं यतः ॥ ततो न प्रीतिविषयस्तनुवित्तसु- खात्मकः ॥ ६९ ॥