शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)
Shiva Samhita with Hindi Commentary
भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंप्रथमपटलः । (२५) टीका-यह झूठा मायाका प्रपंच विषयसुख धन शरीर है इनमें प्रीति करना उचित नहीं है यह सब त्यागनेके योग्य है ॥ ६९ ॥ मूलम्-अरिर्मित्रमुदासीनस्त्रिविधं स्यादिदं जगत् ॥ व्यवहारेषु नियतं दृश्यते नान्यथा पुनः ॥ ७० ॥ टीका-शत्रु मित्र उदासीनता यही तीन प्रकारके व्यवहारका प्रवाह इस संसारमें निश्चय देखपड़ता है॥७०॥ मूलम्-प्रियाप्रियादिभेदस्तु वस्तुषु नियतः स्फुटम् ॥ आत्मोपाधिवशादेवं भवेत्पुत्रा- दि नान्यथा ॥७१॥ मायाविलसितं विश्वं ज्ञात्वैवं श्रुतियुक्तितः ॥ अध्यारोपापवा- दाभ्यां लयं कुर्वन्ति योगिनः ॥ ७२ ॥ टीका-और प्रिय अप्रिय यही दो भेदसे जगत् बँधा है ॥ आत्माके उपाधिसे पिता पुत्रादि होतेहैं यह जगत् मायासे विलसितहै यह श्रुति प्रमाणसे जानके योगी लोग अध्यारोप अपवादसे आत्मामें लय करतेहैं अ- र्थात् शुद्धचैतन्यका मनन करते हैं ॥ ७१ ॥ ७२ ॥ मूलम्-कर्मजन्यं विश्वमिदं नत्वकर्मणि २