शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)
Shiva Samhita with Hindi Commentary
भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ३४ ) शिवसंहिता भाषाटीकासमेता । मूलम्-मांसास्थिस्नायुमज्जादिनिर्मितं भो- गमन्दिरम् ॥ केवलं दुःखभोगाय नाडीसं- ततिगुंफितम् ॥ ९८॥ टीका-मांस अस्थि स्नायु मज्जा आदि नाडियोंसे बँधाहूआ यह भोगमन्दिर अर्थात् शरीर केवल दुःखका कारण है, तात्पर्य यह है कि, ऐसा शरीर जिसके उत्पत्ति स्थितिके स्मरण करनेसे घृणा होती है उसमें व्यर्थ मनु- ष्य मायामें फँसके मोह और अभिमान करताहै ॥९८॥ मूलम्--पारमेष्ठ्यमिदं गात्रं पंचभूतविनि- र्मितम्॥ब्रह्माण्डसंज्ञकं दुःखसुखभोगाय कल्पितम् ॥ ९९ ॥ टीका--यह शरीर ब्रह्माके द्वारा पंचभूतसे निर्मित ब्रह्मांडसंज्ञा सुख दुःख भोगनेके हेतु कल्पितहै ॥९९ ॥ मूलम्--बिन्दुः शिवो रजः शक्तिरुभयोर्मि- लनात्स्वयम् ॥ स्वप्रभूतानि जायन्ते स्वशक्त्या जडरूपया ॥ १०० ॥ टीका-शिवरूप बिन्दु और शक्तिरूप रज इन दो- नोंके संबन्धसे ईश्वरकी शक्ति जडरूपा महामाया अ- पनी प्रभुतास शरीरोंको उत्पन्न करती है ॥ १०० ॥