शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)
Shiva Samhita with Hindi Commentary
भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ४२ ) शिवसंहिता भाषाटीकासमेता । टीका-वह चित्रानाडी पंचवर्ण अतिउज्ज्वल शुद्ध है और देहके उपाधिका कारणभी वही सुषुम्णान्त- र्गता अर्थात् चित्रा नाडी है. तात्पर्य यह है कि, आत्म- स्वरूप वही है ॥ १९ ॥ मूलम्-दिव्यमार्गमिनं प्रोक्तममृतानन्द- कारकम् ॥ ध्यानमात्रेण योगींद्रो दुरि- तौघं विनाशयेत् ॥ २० ॥ टीका-यह मार्ग बहुत श्रेष्ठ अमृतानन्दकारक मु- क्तिका दाता हमने कहा है जिसके ध्यानमात्रसे योगी लोगोंके पापका समूह नाश होजाताहै ॥ २० ॥ मूलम्--गुदात्तु द्व्यंगुलादूर्ध्वं मेढ्रात्तु द्व्यंगुला- दधः ॥ चतुरंगुलविस्तारमाधारं वर्तते समम् ॥ २१ ॥ टीका-गुदासे दो अंगुल ऊपर और मेढ्रसे दो अं- गुल नीचे मध्यमें चार अंगुल विस्तार आधारपद्म है॥ २१॥ मूलम्-तस्मिन्नाधारपद्मे च कर्णिकायां सु- शोभना ॥ त्रिकोणा वर्त्तते योनिः सर्वतं- त्रेषु गोपिता ॥ २२ ॥ टीका-उस आधारपद्मके कर्णिकामें अर्थात् डंडीमें