भारतकोश
शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

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( ४४ ) शिवसंहिता भाषाटीकासमेता । षुमणाको आवृत्त करती हुई अर्थात् उससे मिलीहुई नासिकाके दक्षिणद्वारको गई है ॥ २५ ॥ मूलम्-पिङ्गला नाम या नाडी दक्षमार्गे व्यवस्थिता ॥ सुषुम्णा सा समाश्लिष्य वामनासापुटे गता ॥२६ ॥ टीका-दक्षिणमार्गमें जो पिङ्गला नाडी है वह सुषु- म्णाके आसरे होके नासिकाके वामद्वारको गई है॥२६॥ मूलम्-इडापिंगलयोर्मध्ये सुषुम्णा या भ- वेत्खलु ॥ षट्स्थानेषु च षट्शक्तिं षट्- पद्मं योगिनो विदुः ॥ २७ ॥ टीका-इडा पिङ्गलाके मध्यमें सुषुम्णा है इस सुषु- म्णाके छः स्थानमें छः शक्ति हैं इनके नाम यह हैं डा- किनी, हाकिनी, काकिनी, लाकिनी; राकिनी, शाकिनी, और इन्हीं छः स्थानोंमें छः पद्म हैं उनके नाम यह हैं आधार, स्वाधिष्ठान, मणिपूर, अनाहत, विशुद्ध, आज्ञा यह अपने ज्ञानसे योगी लोग जानते हैं ॥ २७ ॥ मूलम्-पंचस्थानं सुषुम्णाया नामानि स्युर्बहूनि च ॥ प्रयोजनवशात्तानि ज्ञात- ानीह शास्त्रतः ॥ २८ ॥