भारतकोश
शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

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( ४८ ) शिवसंहिता भाषाटीकासमेता । वासनारूपी बेडीमें फँसके मालाके तरह घूमा करता है ॥ ३९ ॥ मूलम्--नानाविधगुणोपेतः सर्वव्यापारका- रकः ॥ पूर्वार्जितानि कर्माणि भुनक्ति विविधानि च ॥ ४० ॥ टीका-सोई जीव नानाप्रकारके गुण ग्रहण करताहै और संसारमें बहुत प्रकारके व्यापार करताहै यह सब पूर्वार्जित शुभाशुभ कर्मके फल भोगताहै ॥ ४० ॥ मूलम्--यद्यत्संदृश्यते लोके सर्वं तत्कर्मस- म्भवम् ॥ सर्वः कर्मानुसारेण जन्तुर्भोगा- न्भुनक्ति वै ॥ ४१ ॥ टीका-जो जो शुभाशुभ कर्म संसारमें देखपड- ताहै वह सबका आदिकारण कर्मही है प्राणीमात्र अपने कर्मके अनुसार भोग भोगता है ॥ ४१ ॥ मूलम्--ये ये कामादयो दोषाः सुखदुःख- प्रदायकाः॥ ते ते सर्वे प्रवर्तन्ते जीवकर्मा- नुसारतः ॥ ४२ ॥ टीका-जो जो काम क्रोध आदिसे सुख दुःख होताहै सो सब जीवके कर्महीके अनुसार वर्तताहै ॥ ४२ ॥