शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)
Shiva Samhita with Hindi Commentary
भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंतृतीयपटलः । ( ६९ ) ग्रहम् ॥ अल्पनिद्रा पुरीषं च स्तोकं मूत्रं च जायते ॥ ५२ ॥ टीका-उस कालतक योगके हेतु पूर्वोक्त नियम करना उचित है जबतक वायु न सिद्ध होय और यो- गीको थोड़ी निद्रा और थोड़ा मलमूत्र होता है ॥ ५२॥ मूलम्-अरोगित्वमदीनत्वं योगिनस्तत्त्वद- र्शिनः ॥ स्वेदो लाला कृमिश्चैव सर्वथैव न जायते ॥ ५३ ॥ कफपित्तानिलाश्चैव सा- धकस्य कलेवरे ॥ तस्मिन्काले साधक- स्य भोज्येष्वनियमग्रहः ॥ ५४ ॥ टीका-तत्त्वदर्शी योगीको कायिक वा मानसिक व्यथा उत्पन्न नहीं होती और स्वेद लाला कृमिआदि उत्पन्न नहीं होते और साधकके शरीरमें कफ पित्त वातका दोषभी नहीं होता पूर्वोक्त कालतक साधक भोजन आदिका नियम करे ॥ ५३ ॥ ५४ ॥ मूलम्-अत्यल्पं बहुधा भुक्त्वा योगी न व्यथते हि सः॥अथाभ्यासवशाद्योगी भू- चरीं सिद्धिमाप्नुयात् ॥ यथादर्दुरजन्तूनां गतिः स्यात्पाणिताडनात् ॥ ५५ ॥ टीका-योगीको बहुत थोड़ा या विशेष भोजन क-