भारतकोश
शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

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पृष्ठ 86

(८२) शिवसंहिता भाषाटीकासमेत। मूलम्-दन्तैर्दन्तान्समापीड्य पिबेद्वायुं शनैः शनैः ॥ ऊर्ध्वजिह्वः सुमेधावी मृत्युं जयति सोचिरात् ॥ ९१ ॥ टीका-जो बुद्धिमान् दांतसे दांतको पीडित करके धीरे धीरे वायुपान करेगा और जिह्वा ऊपर करके अ- मृतपान करेगा सो शीघ्र मृत्युको जीतलेगा ॥ ९१ ॥ मूलम्-षण्मासमात्रमभ्यासं यः करोति दि- नेदिने ॥ सर्वपापविनिर्मुक्तो रोगान्नाश- यते हि सः॥ ९२ ॥ संवत्सरकृताभ्या- सान्मृत्युं जयति निश्चितम्॥ तस्मादति- प्रयत्नेन साधयेद्योगसाधकः ॥९३॥ वर्ष- त्रयकृताऽभ्यासाद्भैरवो भवति ध्रुवम् ॥ अणिमादिगुणान्‌लब्ध्वा जितभूतगणः स्वयम् ॥ ९४ ॥ टीका-जो पहिले कहेहुए अभ्यासको नित्य छः मास करे तो सब रोगोंका नाश होजायगा और सब पापसे मुक्त होजाय और उसी अभ्यासको एकवर्ष करे तो मृत्युको निश्चय जीतले इस हेतुसे साधक इस क्रि- याका यत्न करके अवश्य साधन करे और यदि इसका अभ्यास तीनवर्ष करे तो निश्चय भैरव होजाय और