भारतकोश
शिव सूत्र (क्षेमराज विमर्शिनी व हिन्दी व्याख्या सहित)

शिव सूत्र (क्षेमराज विमर्शिनी व हिन्दी व्याख्या सहित)

Shiva Sutras with Kshemaraja Vimarshini & Hindi Translation

महर्षि वसुगुप्त / आचार्य क्षेमराज द्वारा

स्रोत: काश्मीर शैव दर्शन ट्रस्ट · काश्मीर शैव दर्शन ट्रस्ट · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished108 पृष्ठ

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xxi क्रमांक विषय सूत्रांक पृष्ठ २०. तुर्य-चमत्कार से युक्त योगी २५,२६ ४६ २१. संसिद्ध योगी के आलापादि २७,२८ ४९ २२. परमार्थज्ञान प्रदान करने में समर्थ योगी २९,३०,३१ ५० २३. तुर्य-चमत्कार के विमर्श से योगी की निष्कम्पता ३२,३३,३४ ५३ २४. कर्मात्मा जीव ३५ ५६ २५. अनर्गल शक्तिपात से स्वातन्त्र्ययोग का उदय ३६,३७ ५७ २६. सावधानता की आवश्यकता (शब्दस्पर्शादि विषयों के उपभोग पर रुद्रयामलतन्त्र से उद्धृत कई अभ्यासों के उदाहरण) ३८ ५८ २७. बाह्यरूपता में भी अभ्यास का दृढीकरण ३९ ६३ २८. विमर्श शिथिल पड़ने पर विषयोन्मुख प्रसर ४० ६५ २९. तुर्यानन्द दशा में व्यक्तिगत अभिलाषा का नाश ४१ ६६ ३०. सुप्रबुद्ध योगी की देह में स्थिति (शंका-समाधान) ४२,४३ ६६ ३१. ऐसे योगी की अलौकिकता ४४ ७० ३२. उस परमयोगी के योग का फल ४५ ७१ शिवसूत्रसार — ७२