भारतकोश
श्री भक्तमाल (नाभादास जी कृत - प्रियादास जी टीका सहित)

श्री भक्तमाल (नाभादास जी कृत - प्रियादास जी टीका सहित)

Shri Bhaktamal of Nabhadas with Priyadas Commentary

गोस्वामी नाभादास जी / प्रियादास जी द्वारा

DevanagariHindipublished195 पृष्ठ

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१) (श्री भक्तमाल श्रीभगवतरसिकजी महाराज कृत – श्रीभक्त-नामावली हम सौं इन साधुन सौं पंगति। जिनको नाम लेत दुख छूटत, सुख लूटत तिन संगति।। मुख्य महन्त काम रति गणपति, अज महेश नारायण। सुर नर असुर मुनी पक्षी पशु, जे हरि भक्त परायन।। बाल्मिकी नारद अगस्त्य शुक, व्यास सूत कुल हीना। शबरी स्वपच वशिष्ठ विदुर, विदुरानी प्रेम प्रबीना।। गोपी गोप द्रोपदी कुन्ती, आदि पण्डवा ऊधो। विष्णु स्वामी निम्बारक माधो, रामानुज मग सूधो।। लालाचारज धनुर्दास, कुरेश भाव रस भीजे। ज्ञानदेव गुरु शिष्य त्रिलोचन, पटतर को कहि दीजे।। पद्मावती चरन को चारन, कवि जयदेव जसीलो। चिन्तामनि चिद्रूप लखायो, विल्वमंगलहिं रसीलो।। केशव भट्ट श्रीभट्ट नरायन, भट्ट गदाधर भट्टा। विट्ठलनाथ वल्लभाचारज, ब्रज के गूजर जट्टा।। नित्यानन्द अद्वैत महाप्रभु, शची सुवन चैतन्या। भट्ट गुपाल रघुनाथ जीव, अरु मधू गुसाँई धन्या।। रूप सनातन भज वृन्दावन, तजि दारा सुत सम्पति। व्यास दास हरिवंश गुसाँईं, दिन दुलराई दम्पति।। श्रीस्वामी हरिदास हमारे, विपुल विहारिनि दासी। नागरि नवल माधुरी वल्लभ, नित्य विहार उपासी।। तानसेन अकबर करमैती, मीरा करमाबाई। रत्नावती मीर माधव, रसखानि रीति रस गाई।। अग्रदास नाभादि सखी ये, सबै राम सीता की। सूर मदनमोहन नरसी अलि, तस्कर नवनीता की।।