भारतकोश
श्री भक्तमाल (नाभादास जी कृत - प्रियादास जी टीका सहित)

श्री भक्तमाल (नाभादास जी कृत - प्रियादास जी टीका सहित)

Shri Bhaktamal of Nabhadas with Priyadas Commentary

गोस्वामी नाभादास जी / प्रियादास जी द्वारा

DevanagariHindipublished195 पृष्ठ

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१०६) (श्री भक्तमाल भोर ही महोच्छौ कियौ, जोई माँगै सोई दियौ, नाना पकवान रस खान स्वाद लागे हैं। सन्त कौ सरूप धरि, लै प्रसाद गोद भरि, गये तहाँ पावै जू तिलोक गृह पागे हैं।। कौन सो तिलोक? अरे दूसरो तिलोक मैं न, बैन सुनि चैन भयौ, आये निसि रागे हैं। चहल-पहल धन, भर्यौ, घर देखि ठर्यो, प्रभु, पदकंज जानी, मेरे भाग जागे है।।४०८।। अभिलाषपूरक भक्तजी अभिलाष अधिक पूरन करन ये चिन्तामणि चतुरदास।। सोम भीम सोमनाथ विको विशाखा लमध्याना। महदा मुकुन्द गयेश त्रिविक्रम रघु जग जाना।। बालमीकि वृद्धव्यास जगन झाँझू बीठल आचारज। हरभूलाला हरिदास बाहुबल राघव आरज।। लाखा छीतर उद्धव कपूर घाटम घोरी कियौ प्रकास। अभिलाष अधिक पूरन करन ये चिन्तामणि चतुरदास।।६६।। दिग्गज भक्तजी भक्तपाल दिग्गज भगत, ए थानापति सूर धीर।। देवानन्द नरहरियानन्द, मुकुन्द महीपति सन्तराम तम्बोली। खेम श्रीरंग नन्द विष्णु बीदा बाजूसुत जोरी।। छीतम द्वारकादास माधव मांडन रूपा दामोदर। भल नरहरि भगवान बालकान्हर केशव सोहैं घर।। दास प्रयाग लोहंग गुपाल नासूसुत गृह भक्तभीर। भक्तपाल दिग्गज भगत, ए थानापति सूर धीर।। १००।। श्रीहरिभजन परायण भक्तजी बद्रीनाथ उड़ीसे द्वारका, सेवक सब हरिभजन पर।। केसौ पुनि हरिनाथ, भीम खेता गोविन्द ब्रह्मचारी। बालकृष्ण बड़भरथ, अच्युत अपया व्रत धारी।।