भारतकोश
श्री भक्तमाल (नाभादास जी कृत - प्रियादास जी टीका सहित)

श्री भक्तमाल (नाभादास जी कृत - प्रियादास जी टीका सहित)

Shri Bhaktamal of Nabhadas with Priyadas Commentary

गोस्वामी नाभादास जी / प्रियादास जी द्वारा

DevanagariHindipublished195 पृष्ठ

पृष्ठ 150, कुल 195 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 150

श्रीबावनजी) (१३५

रसिक रँगीलौ भजनपुंज, सुठि वनवारी स्याम कौ ।। १३३ ।।

श्रीनारायण मिश्रजी भागौत भलीविधि कथन कौ, धनि जननी एकै जन्यौ ।। नाम नरायन मिश्र, वंश नवला जू उजागर। भक्तन की अति भीर, भक्ति दशधा कौ आगर ।। आगम निगम पुरान, सार शास्त्रनि सब देखे। सुरगुरु शुक सनकादि, व्यास नारद जु बिसेखे ।। सुधा बोध मुख सुरधुनी, जस वितान जग में तन्यौ। भागौत भलीविधि कथन कौ, धनि जननी एकै जन्यौ ।। १३४ ।।

श्रीराधवदासजी कलिकाल कठिन जग जीतियो, राधौ की पूरी परी ।। काम क्रोध मद मोह, लोभ की लहर न लागी। सूरज ज्यों जल संग्रहै, बहुरि ताही ज्यों त्यागी ।। सुन्दर शील सुभाव, सदा सन्तैन सेवा व्रत। गुरु धर्म निकष निर्वह्यौ, विश्व में विदित बड़ौ भृत ।। अल्हराम रावल कृपा, आदि अन्त धुकती धरी। कलिकाल कठिन जग जीतियो, राधौ की पूरी परी ।। १३४ ।।

श्रीबावनजी हरिदास भलप्पन भजनबल, बावन ज्यौं बढ़यौ बावनौ ।। अच्युतकुल सौं दोष, सुपनेहूँ उर नहिं आनै। तिलक दाम अनुराग, सबनि गुरुजन करि मानै ।। सदन माँहि वैराग्य, विदेहिन की सी भाँती। रामचरण मकरन्द, रहति मनसा मदमाती ।।