भारतकोश
श्री भक्तमाल (नाभादास जी कृत - प्रियादास जी टीका सहित)

श्री भक्तमाल (नाभादास जी कृत - प्रियादास जी टीका सहित)

Shri Bhaktamal of Nabhadas with Priyadas Commentary

गोस्वामी नाभादास जी / प्रियादास जी द्वारा

DevanagariHindipublished195 पृष्ठ

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श्रीकान्हरदासजी) (१५६ राघौ रुचिर सुभाव, असद् आलाप न भावै। कथा कीर्त्तन नेम, मिलैं सन्तनि गुन गावै॥ ताय तोलि पूरौ, निकष ज्यौं घन, अहरनि हीरौ सहन्त। दूबरो जाहि दुनियाँ कहै, सो भक्त भजन, मोटौ महन्त॥ १६८॥ दासनि के दासत्व कौ, चौकस चौकी ये मड़ी॥ हरि नारायण नृपति, पद्म बेरछे विराजैं। गाँव हुसंगाबाद, अटल ऊधौ भल छाजैं॥ भैलै तुलसीदास, भट ख्यात देवकल्याने। बोहिथवीरा रामदास, सुहेलैं परम सुजाने॥ औली परमानन्द कै, ध्वजा सबल धर्म की गड़ी। दासनि के दासत्व की, चौकस चौकी ये मड़ी॥ १६६॥ अबला शरीर साधन सबल, ये बाई हरिभजन बल। देमा प्रगट सब दुनी, रामाबाई वीराँ हीरामनि। लाली नीरा लक्ष्म, जुगुल पार्वती जगत् धनि॥ खीचनि केसी धना, गोमती भक्त उपासिनी। बाँदररानी विदित, गंगा जमुना रैदासिनी॥ जेवा हरिषां जोइसिनि, कुँवरिराय कीरति अमल। अबला शरीर साधन सबल, ये बाई हरिभजन बल॥ १७०॥ श्रीकान्हरदासजी कान्हरदास सन्तनि कृपा, हरि हिरदै लाहौ लह्यौ॥ श्रीगुरू शरणै आय, भक्ति मारग सत जान्यौ। संसारी धर्महिं छाँड़ि, झूठ अरु साँच पिछान्यौ॥